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नया संकट: ओमिक्रॉन के 'खतरनाक स्ट्रेन' BA.1 ने बढ़ाई चिंता, डेल्टा को भी दे रहा है मात, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

Mon, 10 Jan 2022 04:45 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 10 Jan 2022 04:45 PM IST
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Omicron variant’s sub lineage BA.1 is dominantly circulating and replacing Delta, Scientists warn
ओमिक्रॉन वैरिएंट संक्रमण के बढ़े मामले - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर जारी है। भारत में भी पिछले एक-दो हफ्तों से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक जहां रोजाना के आंकड़े 10 हजार से कम थे, वहीं अब पिछले दो दिनों से रोजाना 1.25 लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 1.79 लाख से अधिक नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं, वहीं ओमिक्रॉन के मामले भी बढ़कर 4 हजार के आंकड़े को पार कर गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक देश में ओमिक्रॉन के साथ-साथ डेल्टा से संक्रमण के मामले भी देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।



वहीं एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के कुछ हिस्सों में ओमिक्रॉन वैरिएंट का उपवंश BA.1 तेजी से बढ़ रहा है। महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में यह डेल्टा वैरिएंट की जगह लेता दिख रहा है। इस बारे में सभी लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

Omicron variant’s sub lineage BA.1 is dominantly circulating and replacing Delta, Scientists warn
ओमिक्रॉन वैरिएंट के उपवंश के केस - फोटो : Pixabay

ओमिक्रॉन वैरिएंट का उपवंश BA.1
डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोम कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) ने एक रिपोर्ट में बताया कि ओमिक्रॉन के सब-लीनिएज BA.1 के मामले
तेजी से बढ़ते देखे जा रहे हैं, यह तेजी से डेल्टा को रिप्लेस कर रहा है। अध्ययनों में ओमिक्रॉन वैरिएंट के तीन उपवंश (BA.1, BA.2,BA.3)  के बारे में पता चला है। देश के कुछ राज्यों में संक्रमितों की टेस्टिंग में BA.1 के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

Omicron variant’s sub lineage BA.1 is dominantly circulating and replacing Delta, Scientists warn
तेजी से बढ़ते जा रहे हैं कोरोना के मामले - फोटो : पीटीआई

BA.1 उप-वंश के मामले सबसे अधिक
आईएनएसएसीओजी के वैज्ञानिकों ने बताया कि सैंपलों के परीक्षण के दौरान हमें ज्यादातर नमूनों में ओमिक्रॉन के मूल स्ट्रेन से ज्यादा BA.1 उप-वंश की उपस्थिति देखने को मिल रही है। 
चूंकि उप-वंश एक ही वायरस परिवार से संबंधित होते हैं, इसलिए सैंपल टेस्टिंग के दौरान सभी को ओमिक्रॉन पॉजिटिव ही मान लिया जाता है। इस स्ट्रेन की प्रकृति को जानने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं, फिलहाल ओमिक्रॉन के तीन उपवंशों में सबसे ज्यादा BA.1 के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि संभवत: इसकी संक्रामता दर अन्य की तुलना में और अधिक हो सकती है। 

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Omicron variant’s sub lineage BA.1 is dominantly circulating and replacing Delta, Scientists warn
कोरोना की जांच कराना जरूरी - फोटो : Pixabay

क्या आरटीपीसीआर टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि नए वैरिएंट्स और स्ट्रोनों का पता लगाने में भी व्यापक रूप से प्रयोग में लाए जा रहे आरटी-पीसीआर परीक्षण सफल साबित हो रहे हैं। आरटी-पीसीआर परीक्षण या एंटीजन किट से संक्रमण के मामलों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि कुछ साक्ष्य यह बताते हैं कि BA.2 जैसे उप-वंश का पता लगाने में आरटी-पीसीआर परीक्षण की विश्वसनीयता पर अभी सवालिया निशान है।

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कोरोना वायरस से करें बचाव - फोटो : iStock

नए खतरों से बचाव करते रहने की जरूरत
हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ओमिक्रॉन के जीनोमिक सीक्वेंस में 99 प्रतिशत BA.1 सब लीनिएज ही हैं। ओमिक्रॉन वैरिएंट पहले ही सबसे अधिक संक्रामक माना जा रहा है ऐसे में इसके BA.1 उप-वंश के बढ़ते मामलों ने चिंता और बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की सलाह दी है, ताकि कोरोना के इस तेजी से बढ़ते प्रसार को नियंत्रित किया जा सके। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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