भारत सहित दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर जारी है। अध्ययनों में ओमिक्रॉन की संक्रामता दर काफी अधिक बताई जा रही है, यही कारण है कि संक्रमण का जोखिम उन लोगों में भी लगातार बना हुआ है, जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। कोरोना के इस नए वैरिएंट से बचाव का तरीका, वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है। इसी बारे में शोध कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने खतरे से बचाव को लेकर बड़ा दावा किया है। नेचर मेडिसिन जर्नल में हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि जिन लोगों का ट्रिपल वैक्सीनेशन हो चुका है, उनमें ओमिक्रॉन से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।
Omicron Variant: संक्रमण से इन चार तरह के लोगों को माना जा सकता है अधिक सुरक्षित, जानिए क्या आप हैं इन मानकों में?
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ऐसे लोगों में हो सकती हैं प्रभावी एंटीबॉडीज
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान पाया कि वैक्सीन की तीन खुराक ले चुके, कोरोना वायरस से तीन बार संक्रमित हो चुके, संक्रमण के बाद वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके और दो डोज ले चुके वह लोग जिन्हें ब्रेक-थ्रू इंफेक्शन हुआ है, उनमें ओमिक्रॉन से संक्रमण का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में कम पाया गया है। वैक्सीनेशन कर चुके और संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों पर दो साल तक किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
जर्मनी स्थित म्यूनिख टेक्निकल यूनिवर्सिटी (टीयूएम) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में शामिल 98 लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके थे जबकि 73 लोग ऐसे थे जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ था। दोनों समूहों को एमआरएनए-आधारित फाइजर वैक्सीन दी गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को पहले तीन बार कोरोना का संक्रमण हो चुका था, उनमें उच्च गुणवत्ता के साथ उच्च क्वालिटी वाली एंटीबॉडीज पाई गईं। ये एंटीबॉडीज वायरल स्पाइक प्रोटीन को अधिक मजबूती से बांधने में सक्षम हैं, जिससे ओमिक्रॉन जैसे वैरिएंट से मुकाबला आसान हो सकता है।
टीकाकरण से मिल सकती है प्रभावी सुरक्षा
अध्ययनकर्ताओं नें ऐसी ही एंटीबॉडीज उन लोगों में भी देखीं जिनको वैक्सीन की तीन डोज मिल चुकी थीं, या फिर संक्रमण से ठीक होने के बाद जिनको दोनों डोज मिल चुकी थीं। टीयूएम के प्रोफेसर पर्सी नोल कहते हैं, टीकाकरण के माध्यम से निर्मित एंटीबॉडीज भविष्य के वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं। इसके अलावा ब्रेक-थ्रू इंफेक्शन से भी ठीक होने वाले लोगों में ऐसे ही प्रभाव देखने को मिले हैं।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
मैक्स वॉन पेटेंकोफ़र इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर ओलिवर टी केप्लर कहते हैं, जिस तरह से ओमिक्रॉन वैरिएंट की प्रकृति देखी गई है, उससे पता चलता है कि इसके संक्रमण से बचाव के लिए अधिक और बेहतर एंटीबॉडी की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं ने एक नया वायरस न्यूट्रलाइजेशन टेस्ट भी विकसित किया, जिसकी मदद से ब्लड सैंपल के माध्यम से वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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