चिकित्सा को नोबल पेशे के रूप में जाना जाता है और चिकित्सकों को समाज में भगवान का दर्जा दिया गया है। चिकित्सकों को हमारे समाज का सुपरहीरो भी कहा जाता है, कोरोना महामारी से लेकर किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संकट में डॉक्टर्स समाज के लिए ढाल बनकर खड़े रहे हैं। कठिन से कठिन बीमारियों में रक्षक बनने वाले चिकित्सक कितने स्वस्थ हैं, क्या आपने कभी इस बारे में सोचा?
National Doctors Day 2024: मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं डॉक्टर्स, 46% को हिंसा का डर
डॉक्टर्स के प्रति रहें संवेदनशील
अमर उजाला से बातचीत में डॉ. वसीम गौहरी (मधुमेह रोग विशेषज्ञ) बताते हैं, डॉक्टरों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जनता को बताने, उनके अथक प्रयासों की सराहना करने और बेहतर संसाधनों और काम करने की अनुकूल स्थितियां सुनिश्चित करना जरूरी है। भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दिग्गज दूरदर्शी नेता हैं जिनके अग्रणी प्रयासों ने देशभर में चिकित्सा पद्धति, लोगों तक इसकी पहुंच और देखभाल को उन्नत किया है।
हालांकि इन सबके बीच डॉक्टर्स के साथ अक्सर होने वाली मारपीट-दुर्व्यवहार की घटनाओं को रोकने, उनके व्यक्तिगत जीवन को स्पेस देने और डॉक्टर्स के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं डॉक्टर
साल 2023 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने एक सर्वे में बताया गया है कि हमलों और आपराधिक मुकदमे का डर, नींद की कमी तनाव, सामाजिक परिवेश, रूढ़िवादिता के चलते देश में डॉक्टरों का एक बड़ा तबका मानसिक रोगों का शिकार है। सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 82.7% डॉक्टर अपने पेशे में तनाव महसूस करते हैं।
अलग-अलग विभाग से जुड़े देशभर के 1,681 डॉक्टरों पर किए गए इस सर्वेक्षण में शामिल 46.3% डॉक्टरों ने हिंसा के डर को तनाव का मुख्य कारण बताया, वहीं 13.7 फीसदी ने बताया कि उनपर आपराधिक मुकदमा चलाने की आशंका थी। अपने मरीजों को हर रात 6-8 घंटे की नींद पूरी करने की सलाह देने वाले डॉक्टर्स खुद कई कारणों से नींद पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
काम के दबाव के चलते स्वस्थ आहार तो दूर कइयों को तो दिन का भोजन भी सही से नहीं मिल पाता।
भगवान नहीं हैं डॉक्टर
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत कहते हैं, कई चीजें हैं जिसे बदलने की विशेष आवश्यकता है, जैसे हम डॉक्टर्स को एक तरफ तो भगवान मानते हैं और दूसरी तरफ 'रिटर्न ऑन इनवेसमेंट' चाहते हैं। मतलब अगर आप महंगे अस्पताल में इलाज कराने गए हैं तो पहले ही मान लिया जाता है कि हम ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं तो मरीज को ठीक होना ही चाहिए। पर क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है? क्या अधिक पैसा जान बचाने की गारंटी है?
डॉक्टर्स सॉफ्ट टारगेट भी हैं, कभी किसी डॉक्टर को पीट दिया, किसी को धमकी दे दी, किसी को आत्महत्या पर विवश कर दिया। क्या हम सड़क टूटने के कारण होने वाली दुर्घटना के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार मानते हुए भी उसके साथ ऐसा करते हैं?- नहीं। डॉक्टर्स को भी यह समझना होगा कि उनकी भी एक सीमा है, वह ब्रह्मा नहीं हैं, जो नियति बदल दें। वैसे नियति तो बदलते ब्रह्मदेव भी नहीं थे, उपाय निकाल देते थे बस।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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