वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग से जनित बीमारियां बड़े चिंता का कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपयोग से लेकर फसलों के उत्पादन को बढ़ाने तक के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं में प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए की जाने वाली मल्चिंग प्रक्रिया में प्रयोग की जाने वाले प्लास्टिक कवरिंग के कारण मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का खतरा काफी बढ़ गया है। इसका असर अनाज के माध्यम से शरीर पर पड़ सकता है। अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कई तरह की गंभीर रोगों के प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता है। इंसानों के खून में पहली बार माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए गए हैं।
अध्ययन: खून में पाया गया माइक्रोप्लास्टिक, कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का हो सकता है खतरा, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट
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कृषि क्षेत्रों की मिट्टी का परीक्षण
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ कृषि क्षेत्रों की मिट्टी का परीक्षण किया। अध्ययन में सैंपल में छोटे प्लास्टिक के कण पाए गए, जिसके लिए मल्चिंग प्रक्रिया को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है। शोध की रिपोर्ट के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक न सिर्फ हमारे पर्यावरण के लिए घातक हैं, साथ ही यह रक्त और फेफड़ों में भी पहुंचकर कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले से ही बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण की दिशा में यह नई जोखिमों को बढ़ावा देने वाला हो सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है जिसके कारण फसलों में विषाक्तता बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता
टॉक्सिक्स लिंक की मुख्य कार्यक्रम समन्वयक प्रीति बंथिया महेश कहती हैं, मिट्टी में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक का स्तर पौधों या फसलों द्वारा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आधुनिक कृषि में प्लास्टिक का उपयोग हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बहुत हानिकारक है। मल्चिंग के लिए उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक अपेक्षाकृत पतला होता है और कृषि क्षेत्र से इन प्लास्टिक फिल्मों को हटाना महंगा और चुनौतीपूर्ण होता है। नतीजतन, यह खेत में ही रह जाता है और अंततः मिट्टी में जमा होने वाले सूक्ष्म कणों (माइक्रोप्लास्टिक्स या एमपी) में विघटित हो जाता है। इसके कई तरह से दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने से स्वास्थ्य को कई तरह से गंभीर क्षति होने का जोखिम हो सकता है। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन वाले घावों और विषाक्तता को बढ़ा सकता है। कई अध्ययनों में इसे मनुष्यों में मेटाबॉलिज्म संबंधी गड़बड़ी, न्यूरोटॉक्सिसिटी और कैंसर के खतरे के कारक के रूप में भी संदर्भित किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे दैनिक जीवन में बढ़ता प्लास्टिक का उपयोग कई तरह से हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसमें से कई समस्याओं से हम अनजान होते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते कई प्रकार के कैंसर के खतरे के लिए माइक्रोप्लास्टिक्स को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता रहा है।
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नोट: यह लेख नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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