भारत सहित दुनियाभर के तमाम देशों में कोरोना के तीसरी लहर को लेकर चर्चा जोरों पर है। कई देशों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के कारण मामले फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं, कई स्थानों पर तो लॉकडाउन लगाने जैसी स्थिति भी बनती जा रही है। तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने वैक्सीन को कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया है। तो क्या वैक्सीनेशन के बाद आप कोरोना से खुद को पूर्ण सुरक्षित माना सकते हैं?
आईसीएमआर का अध्ययन: जानिए वैक्सीनेशन के बाद कितने सुरक्षित हैं आप? कितने लोगों को मौत का खतरा?
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तमाम राज्यों से प्राप्त सैंपलों का किया गया अध्ययन
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से टीकाकरण के बाद सकारात्मक परीक्षण वाले सैंपलों को एकत्रित किया। इसमें कुल 482 में से 71 फीसदी लोगों को एक या अधिक लक्षणों के साथ सिम्टोमैटिक लक्षण थे, वहीं 29 फीसदी लोगों में एसिम्टोमैटिक मामलों की पुष्टि हुई। शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण कराने के बाद यदि आप बचाव के उपायों को प्रयोग में नहीं लाते हैं तो कोविड संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। टीकाकरण, रोग की गंभीरता से बचा सकता है, संक्रमण से नहीं।
वैक्सीनेशन करा चुके लोगों में कोरोना के लक्षण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि टीकाकरण के बाद जिन लोगों में सकारात्मक परीक्षण किए गए उनमें बुखार सबसे आम लक्षण था। इसके अलावा रोगियों को सिरदर्द और मतली, खांसी, गले में खराश, गंध और स्वाद की कमी, दस्त, सांस फूलने की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ लोगों में आंखों में जलन और लालिमा सहित शरीर में दर्द की समस्या का भी निदान किया गया।
डेल्टा वैरिएंट अभी भी फैला रहा है संक्रमण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया गया कि भारत के दक्षिणी, पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से डेल्टा और कप्पा वैरिएंट से संक्रमण के मामले देखने को मिले। वहीं देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में अल्फा, डेल्टा और कप्पा वेरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों के बारे में पता चला। शोधकर्ताओं ने बताया कि देश में फिलहाल संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले (86.09%) डेल्टा वैरिएंट के कारण देखे जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के लिए भी इसी वैरिएंट को मुख्य कारण माना जा रहा है।
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) मूल वैरिएंट का म्यूटेटेड स्वरूप है। भारत में इस साल की शुरुआत में इस वैरिएंट के मामले सबसे पहले सामने आए। कई अध्ययनों से पता चलता है कि यह म्यूटेटेड वायरस काफी संक्रामक हो सकता है। भारत में दूसरी लहर में दिखी तबाही के लिए इसी वैरिएंट को प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। इसकी संक्रामकता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत किया है। कुछ रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि दुनियाभर में दी जा रही वैक्सीन कोरोना के इस वैरिएंट के खिलाफ आठ गुना तक कम प्रभावी हो सकती हैं। हाल के दिनों में यूके और इज़राइल में डेल्टा वैरिएंट के कारण ही कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
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नोट: यह लेख इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।
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