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आईसीएमआर का अध्ययन: जानिए वैक्सीनेशन के बाद कितने सुरक्षित हैं आप? कितने लोगों को मौत का खतरा?

Fri, 16 Jul 2021 07:27 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 16 Jul 2021 07:27 PM IST
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infection and mortality rate after covid vaccination, what ICMR Study says
कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत सहित दुनियाभर के तमाम देशों में कोरोना के तीसरी लहर को लेकर चर्चा जोरों पर है। कई देशों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के कारण मामले फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं, कई स्थानों पर तो लॉकडाउन लगाने जैसी स्थिति भी बनती जा रही है। तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने वैक्सीन को कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया है। तो क्या वैक्सीनेशन के बाद आप कोरोना से खुद को पूर्ण सुरक्षित माना सकते हैं?


इसी संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने टीकाकरण के बाद कोविड संक्रमण होने के कारणों को समझने के लिए अध्ययन किया। अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड वैक्सीन ले चुके केवल 10 फीसदी लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। इतना ही नहीं वैक्सीनेशन कर चुके लोगों में मौत का आंकड़ा 0.4 फीसदी के करीब का हो सकता है।
इस अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड संक्रमण से बचे रहने के लिए वैक्सीनेशन सबसे जबरदस्त उपाय हो सकता है। सभी लोगों को टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से सुरक्षा देने में वैक्सीनेश ही एकमात्र उपाय हो सकता है।

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सैंपलों का किया गया अध्ययन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

तमाम राज्यों से प्राप्त सैंपलों का किया गया अध्ययन
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से टीकाकरण के बाद सकारात्मक परीक्षण वाले सैंपलों को एकत्रित किया। इसमें कुल 482 में से 71 फीसदी लोगों को एक या अधिक लक्षणों के साथ सिम्टोमैटिक लक्षण थे, वहीं 29 फीसदी लोगों में एसिम्टोमैटिक मामलों की पुष्टि हुई। शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण कराने के बाद यदि आप बचाव के उपायों को प्रयोग में नहीं लाते हैं तो कोविड संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। टीकाकरण, रोग की गंभीरता से बचा सकता है, संक्रमण से नहीं।

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वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण के लक्षण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

वैक्सीनेशन करा चुके लोगों में कोरोना के लक्षण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि टीकाकरण के बाद जिन लोगों में सकारात्मक परीक्षण किए गए उनमें बुखार सबसे आम लक्षण था। इसके अलावा रोगियों को सिरदर्द और मतली, खांसी, गले में खराश, गंध और स्वाद की कमी, दस्त, सांस फूलने की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ लोगों में आंखों में जलन और लालिमा सहित शरीर में दर्द की समस्या का भी निदान किया गया।

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कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा - फोटो : iStock

डेल्टा वैरिएंट अभी भी फैला रहा है संक्रमण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया गया कि भारत के दक्षिणी, पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से डेल्टा और कप्पा वैरिएंट से संक्रमण के मामले देखने को मिले। वहीं देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में अल्फा, डेल्टा और कप्पा वेरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों के बारे में पता चला। शोधकर्ताओं ने बताया कि देश में फिलहाल संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले (86.09%) डेल्टा वैरिएंट के कारण देखे जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के लिए भी इसी वैरिएंट को मुख्य कारण माना जा रहा है।

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डेल्टा वैरिएंट से सुरक्षा बेहद आवश्यक - फोटो : istock
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) मूल वैरिएंट का म्यूटेटेड स्वरूप है। भारत में इस साल की शुरुआत में इस वैरिएंट के मामले सबसे पहले सामने आए। कई अध्ययनों से पता चलता है कि यह म्यूटेटेड वायरस काफी संक्रामक हो सकता है। भारत में दूसरी लहर में दिखी तबाही के लिए इसी वैरिएंट को प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। इसकी संक्रामकता को देखते हुए  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत किया है। कुछ रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि दुनियाभर में दी जा रही वैक्सीन कोरोना के इस वैरिएंट के खिलाफ आठ गुना तक कम प्रभावी हो सकती हैं। हाल के दिनों में यूके और इज़राइल में डेल्टा वैरिएंट के कारण ही कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।



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नोट: यह लेख इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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