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राहत: भारत में टीबी के इलाज को लेकर बड़ी खबर, आ रही है फेफड़ों में छिपे बैक्टीरिया पर सीधे अटैक करने वाली दवा

Sat, 26 Sep 2026 02:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 26 Sep 2026 02:26 PM IST
सार

TB Treatment In India: भारत में टीबी के इलाज को आसान और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए सीएसआईआर-सीडीआरआई नई दवा पर काम कर रहा है। रिफाब्यूटिन और आइसोनियाजिड के संयोजन को सांस के रास्ते सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने की योजना है। जानवरों पर परीक्षण पूरा हो चुका है और अब इंसानों पर परीक्षण की तैयारी शुरू हुई है।

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India Develops a New Approach to Treat Tuberculosis Drug to Reach Lungs Through Inhalation
टीबी की बीमारी का इलाज - फोटो : Amarujala.com/AI

ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी की बीमारी वैश्विक स्तर पर सेहत के लिए गंभीर चिंता का कारण रही है। भारत की बात करें तो यहां चिंता और भी ज्यादा है।



डब्ल्यूएचओ ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार 2024 में भारत में लगभग 27.1 लाख लोग टीबी से संक्रमित पाए गए और 3 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में टीबी अभी भी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया था पर अब भी न सिर्फ बड़ी संख्या में संक्रमित सामने आ रहे हैं बल्कि भारत टीबी के बड़े बोझ वाला देश बना हुआ है।

टीबी एक संक्रामक बैक्टीरियल रोग है जो आमतौर पर खांसी, छींक या बोलने के दौरान हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से फैलता है। तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक खांसी रहना, बलगम आना और कुछ मामलों में बलगम से खून आना टीबी का आम संकेत माना जाता है। 

टीबी का नाम सुनते ही आज भी सबसे पहले लंबा इलाज, लगातार चलने वाली दवाएं और बीमारी के दोबारा लौटने की चिंता सामने आती है। इलाज उपलब्ध होने के बावजूद बीमारी पर पूरी तरह काबू पाना आसान नहीं है। दवा का लंबा कोर्स, मरीज का इलाज बीच में छोड़ देना, दवाओं के प्रति टीबी के बैक्टीरिया का प्रतिरोध और फेफड़ों में मौजूद संक्रमण तक दवा को पर्याप्त मात्रा में पहुंचाना बड़ी मुश्किलों में शामिल हैं।

India Develops a New Approach to Treat Tuberculosis Drug to Reach Lungs Through Inhalation
सीधे फेफड़ों में पहुंचेगी दवा - फोटो : Adobe Stock

सीधे फेफड़ों में पहुंचाई जाएगी दवा

टीबी के इलाज की चुनौती के बीच भारत से एक नई उम्मीद सामने आई है। लखनऊ स्थित सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिक ऐसी दवा पर काम कर रहे हैं, जिसे खाने के बजाय सीधे सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचकर बैक्टीरिया पर अटैक कर सकती है।इसमें रिफाब्यूटिन और आइसोनियाजिड को मिलाया गया है। जानवरों पर इसका परीक्षण पूरा हो चुका है और अब इंसानों पर परीक्षण की तैयारी शुरू हो रही है।

अगर यह तरीका आगे के परीक्षणों में सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है, तो टीबी के इलाज में दवा को सीधे बीमारी वाली जगह तक पहुंचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 

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टीबी का इलाज होगा आसान - फोटो : Adobe Stock

टीबी का इलाज होगा आसान और प्रभावी

रिपोर्ट बताती है कि टीबी के इलाज में नया विकल्प तैयार किया जा रहा है। सीएसआईआर-सीडीआरआई ने रिफाब्यूटिन और आइसोनियाजिड को मिलाकर ऐसी दवा विकसित की है, जिसे सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचाया जाएगा। यह खास तौर पर टीबी के इलाज में एक नया तरीका हो सकता है। इस दवा के ह्यूमन ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है। जानवरों पर इसका परीक्षण हो चुका है।
 

  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने जानवरों पर दवा की सुरक्षा से जुड़े और आंकड़े मांगे हैं। इसके अलावा यह भी कहा है कि पहले चरण में स्वस्थ लोगों पर दवा को आजमाया जाए।



नसों से जुड़ी बीमारी की दवा के ट्रायल को भी मंजूरी

नसों और मांसपेशियों को धीरे-धीरे कमजोर करने वाली बीमारी एएलएस के इलाज के लिए नई दवा का ह्यूमन ट्रायल अब अगले चरण में पहुंच गया है।

विशेषज्ञ समिति ने उसनॉफ्लास्ट के फेज-3 ट्रायल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। मोइएडीएमएसए नाम की इंजेक्शन वाली दवा के फेज-1 ह्यूमन ट्रायल को अभी सीधे मंजूरी नहीं मिली। समिति ने जानवरों पर दवा के असर और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त आंकड़े मांगे हैं। प्रस्तावित ट्रायल केंद्र को भी उपयुक्त नहीं माना गया है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। ये रिपोर्ट आज के समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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