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सावधान: मेंटल हेल्थ ही नहीं पूरे शरीर के लिए खतरनाक है अकेलापन, इन जानलेवा बीमारियों का बढ़ा देता है खतरा

Fri, 16 Oct 2026 08:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 16 Oct 2026 08:20 PM IST
सार

Loneliness Risk: लंबे समय तक अकेलापन और सामाजिक अलगाव की स्थिति मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। इससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक, तनाव और नींद की समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। परिवार-दोस्तों से बातचीत करना, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है।

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How Loneliness and Social Isolation Impacts Your Heart and Overall Health
अकेलेपन के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI

सोशल मीडिया के इस दौर में भले ही हमारे लाखों फॉलोअर्स हों, पर क्या वास्तविक जिंदगी में आपसे बात करने वाला, आपकी समस्याओं को सुनने वाला कोई है? बड़ी संख्या में लोगों का जवाब होगा-नहीं। यहीं से अकेलेपन की शुरुआत होती है।



अकेलापन या लोनलीनेस वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती समस्या है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सभी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति अकेलेपन का शिकार है, ये स्थिति खामोश महामारी का रूप लेती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना के बाद अब अकेलेपन की समस्या को एक नई 'साइलेंट महामारी' के रूप में देख रहे हैं।

अकेलापन अक्सर हमें मानसिक परेशानी से संबंधित स्थिति लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं मेंटल हेल्थ के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी अकेलेपन की स्थिति की गंभीर असर हो सकता है?

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How Loneliness and Social Isolation Impacts Your Heart and Overall Health
लोगों में अकेलेपन की बढ़ती दिक्कत - फोटो : Freepik.com

अकेलेपन के कारण होने वाली समस्याएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आज का अकेलापन थोड़ा अजीब है। पहले अकेलेपन का मतलब अक्सर आसपास किसी का न होना समझा जाता था। अब भीड़ के बीच रहकर, ऑफिस में लोगों के साथ बैठकर और सोशल मीडिया पर लगातार जुड़े रहने के बावजूद इंसान खुद को अकेला महसूस कर सकता है। स्क्रीन पर चेहरे बहुत हैं, लेकिन दिल की बात कहने वाले कितने हैं, यह सवाल ज्यादा मायने रखता है।
 

  • दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं कि अकेलेपन से सेहत को होने वाला नुकसान रोज एक डिब्बी सिगरेट पीने जितना खतरनाक हो सकता है,  बच्चे-वयस्क सभी चपेट में है।
  • लंबे समय तक अकेलापन स्ट्रेस-डिप्रेशन और सोशल एंग्जायटी जैसी समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • अकेलेपन की स्थिति से दिमागी कार्यक्षमता भी कमजोर होती है और समय के साथ अल्झाइमर या डिमेंशिया का जोखिम 50% तक बढ़ सकता है।
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हार्ट हेल्त पर असर - फोटो : Adobe stock Images

शारीरिक सेहत पर कैसे पड़ सकता है असर?

शोध में पाया गया है कि लंबे समय तक सामाजिक अलगाव और अकेलेपन की स्थिति दिल की बीमारी, स्ट्रोक और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। 
 

  • लंबे समय तक सामाजिक अलगाव और अकेलेपन के शिकार लोगों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लगातार अकेलापन शरीर के स्ट्रेस रिस्पांस को सक्रिय कर देता है, जिससे कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। ये स्थितियां सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को भी सक्रिय कर देती हैं जिसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने और दिल की धड़कन तेज होने की दिक्कत बढ़ जाती है।


 नींद पर असर

अध्ययनों में पाया गया है कि जो लोग लगातार अकेलापन महसूस करता है, तो उसे चिंता या तनाव हो सकता है। कुछ लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती या दिनभर थकान महसूस होती है।

  • 'स्लीप' जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि अकेलापन जरूरी नहीं कि नींद के कुल समय को कम करे। इसके कारण रात में नींद बार-बार टूटती है और बेचैन बनी रहती है, जिससे शरीर को अच्छी नींद और पूरा आराम नहीं मिल पाता।
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अकेलेपन का खतरा - फोटो : Freepik.com

 खानपान और रोजमर्रा की आदतों पर असर

अकेलापन महसूस करने वाले कुछ लोग नियमित व्यायाम, समय पर खाने और अपनी सेहत का ध्यान रखने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। कुछ लोगों में तनाव के कारण ज्यादा खाने या भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक सामाजिक अलगाव वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा भी हो सकता है।


अकेलेपन से निपटने के लिए क्या करें?

अकेलेपन की स्थिति से बचने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं।
 

  • परिवार या दोस्तों से नियमित बातचीत करने के लिए समय निकालें।
  • अपनी पसंद की गतिविधियों, जैसे टहलने, पढ़ने या किसी शौक से जुड़ें।
  • सामाजिक कार्यक्रमों या सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेने की कोशिश करें।
  • अच्छी नींद, संतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें। इससे लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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