हर साल बारिश का मौसम आते ही देशभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के महीने में अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ने लग जाती है। तेज बुखार, प्लेटलेट्स की कमी की समस्याओं के साथ लोग परेशान देखे जाते हैं। एक बार फिर से स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को डेंगू के जोखिमों को लेकर अलर्ट कर रहे हैं।
Mosquito Diseases: आ गई डेंगू की वैक्सीन, पर मच्छरों से होने वाली इन बीमारियों की अब तक नहीं है कोई दवा
भारत में पहली डेंगू वैक्सीन की मंजूरी के बाद मच्छरों से होने वाली अन्य प्रमुख बीमारियों की स्थिति क्या है, उनका इलाज कैसे किया जाता है और किन बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।
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पहले डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा के बारे में जान लीजिए
भारत में मंजूर हुई क्यूडेंगा वैक्सीन जापान की कंपनी टाकेडा फार्मास्युटिकल द्वारा विकसित की गई है वैक्सीन है। इसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप (DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4) से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
- इसकी खास बात यह है कि इसे लगाने से पहले व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं, इसकी जांच जरूरी नहीं होती।
- हालांकि, वैक्सीन को मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं कि यह तुरंत हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हो जाएगी। इसके उपयोग, कीमत, उपलब्धता और टीकाकरण नीति पर आगे स्वास्थ्य एजेंसियां निर्णय लेंगी।
- टाकेडा ने भारत की कंपनी बायोलॉजिकल-ई के साथ मिलकर इस वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की भी तैयारी शुरू कर दी है।
मलेरिया का इलाज मौजूद है?
मलेरिया डेंगू से अलग बीमारी है और यह प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है, जिसे संक्रमित एनोफिलीज मच्छर फैलाते हैं। अच्छी बात यह है कि मलेरिया का प्रभावी इलाज कई वर्षों से उपलब्ध है।
- मरीज की जांच के बाद डॉक्टर संक्रमण के प्रकार के अनुसार आर्टीमिसिनिन-आधारित कॉम्बिनेशन थेरेपी या अन्य एंटीमलेरियल दवाएं देते हैं।
- गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है हालांकि समय पर इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
- साल 2025 में भारत ने अपनी पहली स्वदेशी मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन, एडफाल्सीवैक्स को लाइसेंस दी थी, इसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने विकसित किया है।
चिकनगुनिया का इलाज कैसे होता है?
चिकनगुनिया वायरस भी एडीज मच्छर से फैलता है, लेकिन फिलहाल इसका कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर उपचार करते हैं।
- मरीज को पर्याप्त पानी पीने, आराम करने और बुखार व दर्द कम करने के लिए पैरासिटामोल जैसी दवाएं दी जाती हैं।
- अभी भारत में चिकनगुनिया की कोई ऐसी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से लॉन्च किया गया हो।
- हालांकि कई देशों में इसकी वैक्सीन दी जा रही हैं।
जीका वायरस का इलाज क्या है?
जीका वायरस संक्रमण भी मुख्य रूप से एडीज मच्छरों से फैलता है। अधिकांश संक्रमित लोगों में या तो कोई लक्षण नहीं होते या फिर हल्का बुखार, लाल चकत्ते, आंखें लाल होना और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- जीका वायरस के लिए भी कोई विशेष दवा या व्यापक रूप से उपलब्ध वैक्सीन नहीं है।
- इसमें भी मरीज के लक्षणों को ठीक करने के लिए इलाज दिया जाता है।
- गर्भवती महिलाओं में जीका संक्रमण विशेष चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकृतियों का खतरा बढ़ सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।