आहार को स्वस्थ और पौष्टिक रखकर ही शरीर के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सकता है। अध्ययन भी इस बात को प्रमाणित करते हैं कि हम जिस तरह के आहार का सेवन करते हैं, सेहत पर उसका सीधा प्रभाव होता है। तेजी से बढ़ रही कई गंभीर प्रकार की बीमारियों के लिए भी आहार में गड़बड़ी को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त रखने के लिए हमें उन चीजों के सेवन पर विशेष जोर देना चाहिए जिससे शरीर के लिए आवश्यक ज्यादातर पोषक तत्वों की आसानी से प्राप्ति हो जाए।
Best Diet: दुनियाभर में बढ़ रही है इस तरह के डाइट की आदत, डायबिटीज-कैंसर में इसे पाया गया है बेहद फायदेमंद
प्लांट बेस्ड डाइट के बारे में जानिए
आहार विशेषज्ञ डॉ गरिमा चौधरी बताती हैं, प्लांट बेस्ड डाइट यानि कि पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों के सेवन पर वर्षों से जोर दिया जाता रहा है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि प्लांट-बेस्ड डाइट का मतलब यह नहीं है कि आप मीट-मछली नहीं खा सकते।
पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों से मतलब है कि आपके भोजन में ज्यादातर चीजें पौधों पर आधारित हों जैसे कि सब्जियां, साबुत अनाज और फल, सलाद आदि। अपनी प्लेट का दो-तिहाई हिस्सा इन पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों से भरें। शेष एक तिहाई में अगर आप चाहें तो अंडे, मछली या अन्य चीजों को शामिल कर सकते हैं। आइए इससे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।
पौधों वाले आहार में होता है भरपूर फाइबर
पौधे पर आधारित आहार फाइबर से भरपूर होते हैं। फाइबर वाली चीजों का सेवन करना आपके पाचन को ठीक रखने के साथ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखने में मदद करता है। पौधे पर आधारित आहार खाने से आपकी आंतें भी स्वास्थ रहती हैं, जिससे आप भोजन से पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित कर सकते हैं। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में भी काफी मददगार माने जाते हैं।
कई तरह की बीमारियों में लाभकारी
प्लांट बेस्ड डाइट में मौजूद फाइबर, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इनमें प्रोटीन जैसे कई प्रकार के अन्य पोषक तत्वों की भी भरपूर मात्रा होती है जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है। ऐसे में इस तरह के आहार, बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद करते हैं। अध्ययनों में पौधे पर आधारित आहार हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह और कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी कारगर पाए गए हैं।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।