दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या अब 10 करोड़ 54 लाख से भी अधिक हो गई है, जबकि मरने वालों का आंकड़ा भी 22 लाख 94 हजार से अधिक है। हालांकि कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अब तक पूरी दुनिया में सात करोड़ 71 लाख से अधिक लोग कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। हालांकि इस बीच सबसे बड़ी दिक्कत ये बनी हुई है कि स्वस्थ होने के बाद भी मरीजों पर कोविड-19 का प्रभाव लंबे समय तक रह रहा है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह दावा किया गया गया है कि 'लॉन्ग कोविड' व्यस्कों और बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है।
Coronavirus: बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है लॉन्ग कोविड, अध्ययन में दावा
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लॉन्ग कोविड क्या है?
लॉन्ग कोविड प्रारंभिक बीमारी से परे कई हफ्तों या कई महीनों तक के लिए विभिन्न व्यक्तियों पर कोरोना वायरस के प्रभाव को संदर्भित करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस के मुताबिक, लॉन्ग कोविड 12 हफ्ते से अधिक समय तक रहता है। वहीं कुछ लोगों में आठ हफ्ते से अधिक समय तक लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखते हैं।
लीसेस्टर विश्वविद्यालय और नेशनल स्टैटिस्टिक्स कार्यालय द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, तोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभाव से बचे लोगों में हृदय से जुड़ी समस्याएं, मधुमेह, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। इसके अलावा कोरोना से ठीक होने के कुछ हफ्ते या महीने बाद लोगों में डायबिटीज के नए मामले भी देखने को मिले हैं।
क्या लॉन्ग कोविड बच्चों को प्रभावित कर सकता है?
सबूत बताते हैं कि वयस्कों को प्रभावित करने के अलावा लॉन्ग कोविड बच्चों को भी विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकता है। इसने बच्चों में दुर्लभ बीमारियों को भी विकसित किया है, जिसमें 'मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम' भी शामिल है, जो उनके शरीर के कई हिस्सों जैसे हृदय, फेफड़े, गुर्दे, मस्तिष्क, त्वचा आदि में गंभीर सूजन पैदा कर सकता है। दरअसल, हाल ही में कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों का पता लगाने के लिए बच्चों के एक समूह पर अध्ययन किया गया था।
इस अध्ययन को मेडरिक्सिव (medRxiv) नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। शोध में यह सामने आया कि ठीक होने के बाद भी तीन बच्चों में से एक में कोविड-19 के एक या दो लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि पांच में से एक में कोविड के तीन या उससे अधिक लक्षण दिखाई देते हैं। यह शोध 129 बच्चों के एक समूह पर किया गया था। इस शोध में यह पाया गया कि 18.6 फीसदी बच्चों को सोने में कठिनाई की शिकायत थी और 14.7 फीसदी बच्चों ने सीने में दर्द सहित श्वसन संबंधी समस्याएं होने की शिकायत की, जबकि बंद नाक, थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द बच्चों में दिखने वाले कुछ सबसे सामान्य लक्षण थे। इसके अलावा 10.1 फीसदी बच्चों ने किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होने की शिकायत की।