Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
देश में कोरोना संक्रमण के मामले कम होने लगे थे, लेकिन इस बीच ब्लैक फंगस ने जोर पकड़ लिया और अब तो कोरोना मरीजों में ब्लैक के साथ-साथ व्हाइट और येलो फंगस के भी मामले सामने आने लगे हैं। इन तीनों फंगल संक्रमण को लेकर लोगों में डर का माहौल है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इनसे डरने की नहीं बल्कि इनके बारे में जानने की खुद को उनसे बचाने की जरूरत है। आइए समझते हैं ब्लैक, व्हाइट और येलो, इन तीनों फंगल संक्रमण में अंतर और इनकी पहचान कैसे करें?
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ब्लैक, व्हाइट, येलो फंगस: इन तीनों फंगल संक्रमण में अंतर समझिए, जानें कैसे करें इनकी पहचान
Fri, 28 May 2021 02:43 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 28 May 2021 02:43 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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Black fungus
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ब्लैक फंगस
- मेडिकल भाषा में इसे म्यूकोरमाइकोसिस कहा जाता है। यह म्यूकर या रेसजोपस फंगस के कारण होता है। ये फंगस आमतौर पर मिट्टी, सड़े हुए फल और सब्जियों में पनपते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्लैक फंगस साइनस, दिमाग और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
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कितना खतरनाक है ब्लैक फंगस?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्लैक फंगस संक्रमण अगर फेफड़ों में होता है तो यह ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसके लक्षण देर से दिखाई देते हैं। जब फेफड़ों में इसका संक्रमण होता है तो सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आते हैं। सबसे खतरनाक बात ये कि इसमें मृत्यु दर 50 फीसदी तक होती है।
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व्हाइट फंगस
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व्हाइट फंगस
- मेडिकल भाषा में व्हाइट फंगस को कैनडिडा कहा जाता है। इसमें सफेद धब्बे आ जाते हैं, जीभ पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका संक्रमण किडनी और फेफड़ों में हो सकता है। इससे संक्रमित होने का ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है, जो कमजोर इम्यूनिटी वाले हैं, डायबिटीज से पीड़ित हैं और आईसीयू में लंबे समय तक रहे हैं।
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कितना खतरनाक है व्हाइट फंगस?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि यह म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस जितना खतरनाक तो नहीं होता, लेकिन फिर भी इसमें मृत्यु दर 10 फीसदी के करीब है। व्हाइट फंगस का संक्रमण तब खतरनाक हो जाता है, जब संक्रमण खून में आ जाता है।