Medically Reviewed by-
डॉ सौरभ चौधरी
छाती रोग विशेषज्ञ
विनायक हॉस्पिटल नोएडा
देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर जरूर कम हुआ है लेकिन बीमारी अभी खत्म नहीं हुई है। वायरस में म्यूटेशन के साथ आई दूसरी लहर में मौत के आंकड़े ज्यादा देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना वायरस शरीर से तो चला जाता है लेकिन इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है। कई अध्ययन बताते हैं कि कोरोना वायरस के कारण लोगों को अन्य कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह वायरस शरीर के कई अंगों पर भी बुरा असर डाल रहा है। दूसरी लहर में कोरोना के फेफड़ों को प्रभावित करने वाले मामले ज्यादा देखने को मिले हैं लेकिन संक्रमण से ठीक हो रहे तमाम लोगों में यह वायरस अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
आइए इस लेख में स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानते हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण शरीर के अन्य अंगों में क्या जटिलताएं देखने को मिल रही हैं?
विशेषज्ञों ने चेताया: शरीर को इस तरह से भी नुकसान पहुंचा रहा है कोरोना वायरस, सामने आए कई गंभीर लक्षण
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हार्ट फेलियर के मामले आ रहे हैं सामने
अमर उजाला से बातचीत के दौरान आईएमएस बीएचयू में कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर ओम शंकर बताते हैं कि कोरोना वायरस सीधे तौर पर हृदय की मांसपेशियों पर असर करता है, जिससे हृदय में कमजोरी आ जाती है। गंभीर स्थितियों में हार्ट फेलियर की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कोरोना संक्रमितों में हृदय की गति के अनियंत्रित होने के मामले भी देखने को मिल रहे हैं।
न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं
कई रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि कोविड-19 के रोगियों को मानसिक भ्रम, सिरदर्द, चक्कर आने और धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। जामा न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि वुहान के एक अस्पताल में भर्ती 214 में से एक तिहाई रोगियों में दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं देखने को मिली हैं। अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों में रोगियों को अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग की भी दिक्कत हो सकती है।
ब्लड क्लॉटिंग की गंभीर समस्याएं
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ चौधरी बताते हैं कि कोविड-19 में थ्रोम्बोइम्बोलिज्म फेनोमेना (रक्त का थक्का जमने) के मामले बहुत अधिक देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के वायरस फेफड़ों में रक्त के थक्कों का तेजी से निर्माण करते हैं। फेफड़ों में रक्त के थक्के बनाने से रोगियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। थक्का जमने से रक्त प्रवाह भी बाधित होता है। इन समस्याओं को देखते हुए कोविड के रोगियों को ब्लड थिनर दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। खून के थक्के जमने की स्थिति का पता लगाने के लिए डी-डिमर और फाइब्रिनोजेन जैसे परीक्षणों का आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि कोविड-19 शरीर के विभिन्न भागों में गंभीर सूजन का कारण बनता है, ऐसे में यह रोगी के कोविड-19 से ठीक होने की रफ्तार को भी धीमा कर सकता है। वायरस न केवल फेफड़ों के लिए खतरनाक है, साथ ही यह आपके हृदय और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में लोगों को शरीर में होने वाले परिवर्तनों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।