देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच इससे ठीक होने वालों की संख्या थोड़ी राहत देने वाली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार लोगों से अपील कर रहे हैं कि यदि आपमें कोरोना के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो शीघ्र निदान कराते हुए और सही समय पर इसका उपचार शुरू कर दें। इस तरह से आप खुद को कोरोना के गंभीर संक्रमण का शिकार होने से बचा सकते हैं। हाल के दिनों में कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट भी गलत आने के कई मामले सामने आए हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर, रोगियों से लक्षणों की लगातार निगरानी करते रहने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आपमें कोरोना के हल्के लक्षण हैं तो घर पर भी ये ठीक हो सकते हैं, लेकिन इस दौरान आपकी छोटी से छोटी गलतियां संक्रमण के हल्के स्तर को गंभीर यानी सीवियर में बदल सकती हैं।
सावधान: कोरोना के गंभीर संक्रमण से बचना चाहते हैं तो भूलकर भी न करें ऐसी गलतियां
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पहले दिन से ही शुरू कर दें बचाव के उपाय
अमर उजाला से बातचीत के दौरान एम्स, दिल्ली के डॉ राजीव रंजन (एमडी, लैब मेडिसिन) बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के अधिकांश मामले हल्के स्तर के देखे जा रहे हैं। कोविड संक्रमण के दौरान लोगों को साइटोकिन स्टॉर्म और हैप्पी हाइपोक्सिया जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो रही हैं, जो हल्के लक्षणों तेजी से खराब कर सकते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए डॉ राजीव कहते हैं कि रोगी को पहले दिन से ही बचाव के सभी उपायों को प्रयोग में लाना चाहिए।
आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर कौन सी गलतियां कोरोना के हल्के लक्षणों को तेजी से गंभीर बना सकती हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आपमें कोरोना को लेकर जागरूकता की कमी है तो यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। किसी भी स्थिति में माइल्ड कोविड के मामलों को भी आपको हल्के में नही लेना चाहिए। यदि आपमें कोविड के लक्षण नजर आ रहें हैं तो तुरंत इसकी जांच कराएं। समय पर संक्रमण का पता लगाने से बीमारी को नियंत्रित करने के साथ दूसरे लोगों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
डॉ राजीव कहते हैं कि भले ही इस समय आपको सामान्य बुखार या खांसी हो, बिना किसी डॉक्टर के सलाह के कोई भी दवा न लें। हाल के दिनों में देखने को मिला है कि सोशल मीडिया पर वायरल पर्चियों के आधार पर लोग कोविड के हल्के लक्षणों में भी खुद से स्टेरॉयड का सेवन शुरू कर देते हैं। यह आदत आपके लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बन सकती है। बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड जैसी दवा लेने से आप कोविड के कारण होने वाले ब्लैक फंगस जैसे अन्य संक्रमणों के शिकार हो सकते हैं।
दूसरी लहर में संक्रमण की प्रकृति और इसके लक्षणों में काफी बदलाव देखने को मिला है। इसके अलावा कई लोग लक्षणों के होने के बावजूद भी इसकी जांच नहीं कराते हैं। समय पर संक्रमण का पता न चलना और इलाज न मिल पाना स्थिति को गंभीर बना सकता है। सभी लोगों को लक्षणों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए। यदि अनुपलब्धता के कारण जांच नहीं भी हो पा रहा है तो भी खुद से आइसोलेट करके डॉक्टर के सलाह के आधार पर जल्द इलाज शुरू कर दें। इससे बीमारी पर जल्द नियंत्रण पाने में आसानी रहती है।
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नोट: यह लेख दिल्ली एम्स में एमडी लैब मेडिसिन, डॉ राजीव रंजन के कोरोना संक्रमण के उनके अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।