कोरोना वायरस में म्यूटेशन के कारण दूसरी लहर के दौरान रोगियों में तमाम तरह की समस्याएं देखने को मिलीं। संक्रमण की दूसरी लहर में वायरस शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते संक्रमितों में कई प्रकार के परिवर्तित लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट रहे हैं उनमें लॉन्ग कोविड का भी खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को पहले से ही कोमोरबिडिटी की शिकायत रह चुकी हो, ऐसे लोगों में गंभीर संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना के दौरान हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों में गंभीर समस्याएं देखने को मिलीं, इतना ही नहीं कई लोगों को आपनी जान तक गंवानी पड़ गई।
बड़ी खबर: अब कोरोना रोगियों में कम होगा मौत का खतरा, इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल को मिली मंजूरी
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कोलकाइसिन दवा का होगा ट्रायल
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शनिवार को डीसीजीआई ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और लक्षाई लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड को कोलकाइसिन नामक दवा के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है। सीएसआईआर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि डीसीजीआई ने कोलकाइसिन दवा के टू आर्म फेज-2 ट्रायल के लिए मंजूरी दी है जिससे रोगियों में इसकी सुरक्षा और प्रभावकारिता का आकलन किया जा सके।
कोविड-19 और हृदय संबंधी जटिलताएं
सीएसआईआर महानिदेशक के सलाहकार राम विश्वकर्मा ने बताया- कई अध्ययनों में पाया गया है कि कोविड -19 रोगियों में संक्रमण के दौरान हृदय संबंधी जटिलताएं विकसित हो जाती हैं। इसके कारण रोगियों की मौत के मामले भी सामने आए हैं। ऐसी स्थिति में किसी प्रभावी दवा की खोज की जा रही है। इसी क्रम में माना जा रहा है कि कोलकाइसिन दवा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। अब तक के अध्ययनों में पाया गया है कि इस दवा से प्रो-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स को कम करने में भी मदद मिल सकती है जो तेज रिकवरी में सहायक हो सकता है। इस क्लीनिकल ट्रायल को 8-10 सप्ताह में पूरा हो जाने की उम्मीद है।
भारत में होता है इस दवा का उत्पादन
सहयोगी संस्थान आईआईसीटी के निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया कि अगर इस दवा को मंजूरी मिल जाती है तो इसे पूरे देश में सस्ती कीमत पर आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है। भारत इसके सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। एक प्रमुख मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययनों से पता चलता है कि कोलकाइसिन दवा कार्डियक सर्जरी के बाद कई तरह की गंभीर स्थितियों से बचाने में भी सहायक हो सकता है।
कोलकाइसिन का उपयोग
कोलकाइसिन दवा को अब तक गाउट और फैमिलियल मेडिटेरेनियन फीवर के उपचार में प्रयोग में लाया जाता रहा है। फैमिलियल मेडिटेरेनियन फीवर जोड़ों, फेफड़ों या पेट में सूजन और दर्द पैदा कर सकता है। वहीं जब यूरिक एसिड शरीर में विशेषकर जोड़ों में क्रिस्टल बनाने लगता है तो इस स्थिति को गाउट कहा जाता है। यह दवा मुख्य रूप से गठिया रोधी दवाओं के समूह से संबंधित है।
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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्ट के के आधार पर तैयार किया गया है।
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