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सावधान: दोनों बाहों के ब्लड-प्रेशर रीडिंग में है अंतर? इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

Wed, 14 Jul 2021 06:38 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Wed, 14 Jul 2021 06:38 PM IST
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can blood pressure reading be different in each arm, what it indicates
ब्लड प्रेशर की रीडिंग - फोटो : Social media

अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की स्थिति को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहद खतरनाक मानते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ब्लड-प्रेशर की समस्याओं को कई प्रकार की दीर्घकालिक बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है। जिन लोगों को इस तरह रक्तचाप से संबंधित समस्या हो उन्हें घर पर ही ब्लड-प्रेशर  मापने की मशीन रखनी चाहिए, इससे समय-समय पर आपके सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्यतौर पर ब्लड प्रेशर की जांच करने कि लिए बाएं हाथ से रीडिंग ली जाती है। हालांकि अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों बाहों से रक्तचाप की रीडिंग लेकर स्वास्थ्य संबंधी तमाम तरह का समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। तो क्या दोनों हाथ के ब्लड प्रेशर की रीडिंग अलग-अलग हो सकती है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं?


डॉक्टर कहते हैं, हां दोनों हाथों की रीडिंग अलग-अलग हो सकती है। इस बारे में किए गए अध्ययनों में बताया गया है कि यदि दोनों हाथों के ब्लड प्रेशर की रिडिंग का अंतर काफी अधिक रहता है, तो आपको सावधान हो जाने की आवश्यकता है। यह हृदय रोग और कई अन्य तरह की बीमारियों का संकेत हो सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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दोनों हाथों के ब्लड प्रेशर की रीडिंग में अंतर - फोटो : Pixabay

दोनों बांहों के रक्तचाप रीडिंग में अंतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्पतालों में भी नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए केवल एक हाथ से ही रक्तचाप को मापते हैं। कुछ विशेष मामलों में (जैसे हृदय रोग विशेषज्ञ में पहली जांच) में ही ब्लड प्रेशर की जांच दोनों बाहों से की जाती है। जिस बांह से रीडिंग अधिक आती है, अगली बार से डॉक्टर उसी बांह से जांच करते हैं।
दोनों बाजुओं के बीच रक्तचाप की रीडिंग में मामूली अंतर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। दोनों बाजुओं में शीर्ष (सिस्टोलिक) और नीचे (डायस्टोलिक) की संख्याओं में 10 मिलीमीटर (मिमी एचजी) का अंतर सामान्य माना जाता है, हालांकि यदि यह इससे अधिक रहता है तो इसे हृदय रोगों के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जाता है।

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ब्लड प्रेशर रीडिंग में अंतर कई रोगों का हो सकती है संकेत - फोटो : iStock

बढ़ जाता है कई तरह के रोगों का खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक दोनों हाथों की रीडिंग में बड़ा अंतर पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज, सेरेब्रोवास्कुलर डिजीज, स्ट्रोक, और हृदय से जुडी अन्य समस्याओं की ओर इशारा हो सकता है। दोनों हाथों की रीडिंग में बड़े अंतर से सेरेब्रोवास्कुलर रोगों का जोखिम 60 फीसदी तक बढ़ा सकता है। सेरेब्रोवास्कुलर रोग रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण होता है जो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है। यह स्ट्रोक, कैरोटिड स्टेनोसिस, वर्टेब्रल स्टेनोसिस और इंट्राक्रैनील स्टेनोसिस, एन्यूरिज्म और संवहनी विकृतियों जैसे लक्षण पैदा कर सकता है।

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ब्लड प्रेशर की रीडिंग में अंतर को न लें हल्के में - फोटो : iStock

इन रोगों की ओर हो सकता है इशारा
यदि आपके दोनों हाथों की रीडिंग में बड़ा अंतर है, तो इस कई रोगों के लक्षण के रूप में भी देखा जा सकता है। अगर रीडिंग में यह अंतर लंबे समय तक बना रहता है तो आपको विशेष सावधान हो जाने की आवश्यकता है। दोनों बाहों की रीडिंग लेने से आपको इन स्वास्थ्य समस्याओं को पहचानने में मदद मिल सकती है। इस आधार पर आप इनके उपचार के लिए जल्द से जल्द कदम उठा सकते हैं।

  • बाहों की धमनियों में किसी तरह की रुकावट
  • संज्ञानात्मक हानि
  • मधुमेह
  • किडनी की बीमारी
  • हृदय से संबंधित रोग
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ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का करें प्रयास - फोटो : iStock
दोनों बांहों की रीडिंग को कैसे ठीक कर सकते हैं?
डॉक्टर बताते हैं कि दोनों हाथों के ब्लड प्रेशर की रीडिंग में बड़े अंतर को ठीक करने का कोई उपचार नहीं है। हालांकि आप अपने रक्तचाप को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकते हैं, इससे समस्याओं में भी लाभ मिल जाता है।
  • अपनी दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम को शामिल करें। कम से कम 30 मिनट रोजाना व्यायाम जरूर करें।
  • स्वस्थ आहार का सेवन करें, जितना हो सके ताजी सब्जियां और फल अधिक खाएं।
  • वजन को नियंत्रित रखने के उपाय करते रहें। 
  • अपने दिमाग को आराम दें। तनाव न लें और मेडिटेशन करें।
  • शराब का सेवन कम से कम करें। कोशिश करें कि प्रतिदिन एक ड्रिंक से से अधिक न लें।
  • धूम्रपान से बिल्कुल दूरी बना लें। तंबाकू का धुआं फेफड़ों और धमनियों के लिए बहुत हानिकारक होता है। 
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के प्रभावी उपायों के बारे में जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। 
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नोट: यह लेख मेडिकल वेबसाइट्स से एकत्र की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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