ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) ने अपने 80वें वार्षिक सम्मेलन में 2025 तक भारत में रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को 50% तक कम करने के एक उल्लेखनीय संकल्प की घोषणा की है। रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के मामले मोतियाबिंद, डायबिटिक आई डिजीज, विटामिन 'ए' की कमी और आघात सम्बंधी दृष्टिहीनता के कारण होते हैं। भारत में दृष्टिहीनों की सबसे बड़ी आबादी है। आकलन के मुताबिक हमारे देश में रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के 12 मिलियन मामले हैं, जो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण आंशिक या पूर्ण रूप से दृष्टिहीन हो सकते हैं।
AIOC 2022: साल 2025 तक रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को 50% कम करने का लक्ष्य, जानिए कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें
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भारत में नेत्र-विशेषज्ञों की कमी
एआईओएस के प्रेसिडेंट (2021-22) डॉ. बरुन कुमार नायक ने कहा, "भारत में 60,000 की आबादी के लिए एक नेत्र-विशेषज्ञ है। इस प्रकार लोगों के नेत्र रोगों को ठीक करने के लिए हमारे पेशे पर बहुत भार है। भारत के नेत्र-विशेषज्ञ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षितों में शामिल हैं और वे अपने पेशे को भारत के नागरिकों के लिये सर्वश्रेष्ठ उपयोग में लाने के लिये अथक प्रयास कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता को कम करने के इस प्रयास में सार्वजनिक-निजी भागीदारियों को प्रोत्साहित करे।
एआईओसी 2022 के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन पद्मश्री डॉ. टी. पी. लहाने ने प्रक्रिया समझाते हुए बताया, हम आंखों की चोट से बचने पर जागरूकता भी बढ़ा रहे हैं। हमने हर साल सरकार और अशासकीय संगठनों की सहायता से 7,00,000 से ज्यादा लोगों को अंधेरे से रोशनी की दुनिया में आने में मदद की है।
एआईओएस की मानद सचिव डॉ. नम्रता शर्मा ने सरकार से अपेक्षाएं बताते हुए कहा, "सरकार को चूने की बिक्री पर रोक लगानी चाहिये, क्योंकि चूने के साथ सावधानी नहीं बरतने पर आंखों को चोट लग सकती है और दृष्टिहीनता भी हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों से आंखों की जांच करवाने का आग्रह करने वाले सरकारी विज्ञापन अभियान चलाने चाहिये, ताकि जन-साधारण के बीच सार्वजनिक रूप से जागरुकता लाई जा सके।
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नोट: यह लेख प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।
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