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AIOC 2022: साल 2025 तक रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को 50% कम करने का लक्ष्य, जानिए कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें

Thu, 02 Jun 2022 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 02 Jun 2022 07:41 PM IST
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all india ophthalmic conference 2022, Target to reduce preventable blindness by 50%
ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) - फोटो : Contributers

ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) ने अपने 80वें वार्षिक सम्मेलन में 2025 तक भारत में रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को 50% तक कम करने के एक उल्लेखनीय संकल्प की घोषणा की है। रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के मामले मोतियाबिंद, डायबिटिक आई डिजीज, विटामिन 'ए' की कमी और आघात सम्बंधी दृष्टिहीनता के कारण होते हैं। भारत में दृष्टिहीनों की सबसे बड़ी आबादी है। आकलन के मुताबिक हमारे देश में रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के 12 मिलियन मामले हैं, जो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण आंशिक या पूर्ण रूप से दृष्टिहीन हो सकते हैं।



ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) की स्थापना वर्ष 1930 में हुई थी। सोसायटी के उद्देश्य हैं नेत्र-विज्ञान के अध्ययन और अभ्यास का संवर्धन और प्रचार, समाज को सेवा देने के विचार से शोध और मानव-क्षमता का विकास और देश के नेत्र-विशेषज्ञों के बीच सामाजिक संपर्कों को बढ़ावा देना। सोसायटी देश के विभिन्न भागों में वार्षिक सम्मेलनों का आयोजन करती है।

दृष्टिहीनता रोकथाम का लक्ष्य
एआईओएस के प्रेसिडेंट (2022-23) डॉ. ललित वर्मा ने सम्मेलन में कहा, "रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता से निपटने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता चाहिए, क्योंकि यह लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रत्यक्ष और नाटकीय रूप से प्रभावित करती है। यह व्यक्ति की आर्थिक गतिविधि को भी प्रभावित करती है, जिससे पूरे देश की उत्पादकता प्रभावित होती है।

आयु बढ़ने के साथ होने वाले मोतियाबिंद की समस्या को तुलनात्मक सरलता के साथ हल किया जा सकता है। विटामिन 'ए' की कमी के कारण होने वाले नेत्र रोगों को ठीक करना भी बहुत आसान है। रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता को 2025 तक 50% कम करने का हमारा संकल्प एक राष्ट्रीय पहल बनने वाला है, क्योंकि इसमें हमारे सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।

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आंखों को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : istock

भारत में नेत्र-विशेषज्ञों की कमी

एआईओएस के प्रेसिडेंट (2021-22) डॉ. बरुन कुमार नायक ने कहा, "भारत में 60,000 की आबादी के लिए एक नेत्र-विशेषज्ञ है। इस प्रकार लोगों के नेत्र रोगों को ठीक करने के लिए हमारे पेशे पर बहुत भार है। भारत के नेत्र-विशेषज्ञ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षितों में शामिल हैं और वे अपने पेशे को भारत के नागरिकों के लिये सर्वश्रेष्ठ उपयोग में लाने के लिये अथक प्रयास कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता को कम करने के इस प्रयास में सार्वजनिक-निजी भागीदारियों को प्रोत्साहित करे। 

एआईओसी 2022 के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन पद्मश्री डॉ. टी. पी. लहाने ने प्रक्रिया समझाते हुए बताया, हम आंखों की चोट से बचने पर जागरूकता भी बढ़ा रहे हैं। हमने हर साल सरकार और अशासकीय संगठनों की सहायता से 7,00,000 से ज्यादा लोगों को अंधेरे से रोशनी की दुनिया में आने में मदद की है।

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रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता कम करने का लक्ष्य - फोटो : Pixabay

एआईओएस की मानद सचिव डॉ. नम्रता शर्मा ने सरकार से अपेक्षाएं बताते हुए कहा, "सरकार को चूने की बिक्री पर रोक लगानी चाहिये, क्योंकि चूने के साथ सावधानी नहीं बरतने पर आंखों को चोट लग सकती है और दृष्टिहीनता भी हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों से आंखों की जांच करवाने का आग्रह करने वाले सरकारी विज्ञापन अभियान चलाने चाहिये, ताकि जन-साधारण के बीच सार्वजनिक रूप से जागरुकता लाई जा सके।



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नोट: यह लेख प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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