लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने हमारे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई रिपोर्ट्स में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते रहे हैं कि जिस तरह से हमारी शारीरिक निष्क्रियता बढ़ती जा रही है ये भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाने वाली हो सकती है। इसका कम उम्र से ही ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
Health Alert: देश की करीब आधी आबादी कमर या पीठ में दर्द से परेशान, जानिए क्यों बढ़ती जा रही है ये दिक्कत
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48% भारतीय कमर दर्द से परेशान
एक हालिया मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में करीब 48% लोग कमर या पीठ में दर्द से परेशान रहे हैं। यूके-यूएस में ये दर और भी ज्यादा है। हालांकि अगर समय रहते ही, शुरुआती स्थिति में इस तरह के दर्द पर ध्यान देकर इसका इलाज करा लिया जाए तो इसके गंभीर रूप लेने का खतरा कम हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी की डिस्क पर दबाव बढ़ने लगता है। मांसपेशियों में खिंचाव और बैठने का पोजिशन खराब होने के कारण भी पीठ दर्द हो सकता है। आगे चलकर इससे डिस्क डीजनरेशन और साइटिका जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
गड़बड़ पॉश्चर की दिक्कत
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बैठने या लंबे समय तक खड़े रहते समय अगर आपकी मुद्रा यानी पॉश्चर ठीक नहीं है तो ये पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकती है। बहुत ज्यादा आगे या बहुत ज्यादा पीछे की ओर झुकने की स्थितियां भी समस्या पैदा कर सकती हैं। भले ही आपकी पीठ का दर्द खराब मुद्रा के कारण न हो, लेकिन इससे यह और भी बदतर हो सकता है।
पीठ-कमर में दर्द की इन वजहों पर भी दीजिए ध्यान
कमर-पीठ दर्द के लिए कई अन्य कारणों को भी जिम्मेदार पाया गया है, जिसका सभी लोगों को ध्यान देना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते है, जिन लोगों की शारीरिक गतिविधि कम होती है वह इसका शिकार हो सकते हैं, एक्सरसाइज न करने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
- अत्यधिक वजन या मोटापा रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालता है।
- गलत पोजीशन में स्क्रीन देखने से गर्दन और पीठ पर असर पड़ता है।
- भारी वजन उठाते हैं तो भी सावधानी बरतें। गलत तरीके से वजन उठाने से कमर पर दबाव बढ़ जाता है।
कमर-पीठ दर्द से कैसे बचा जाए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर भी आप इस समस्या के जोखिम को कम कर सकते हैं।
- बैठते, खड़े होते और सोते समय सही पॉश्चर बनाए रखें।
- योग, स्ट्रेचिंग और हल्के वर्कआउट से मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- वजन नियंत्रण में रखें। इसके लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करें।
- लंबे समय तक बैठने से बचें। हर 30-40 मिनट में खड़े होकर हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन युक्त भोजन करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।