सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं और इन सभी पदों पर भर्ती के लिए अप्लाई किया है तो पढ़ें बुरी खबर, आपके पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी।
दरअसल, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग का भर्ती घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने मामले की पुलिस जांच पूरी होने तक सभी नई और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इससे पचास हजार से अधिक भर्तियां प्रभावित होंगी। इस मामले में लगातार हो रही फजीहत के बाद हरियाणा सरकार कड़ा रुख अपना रही है। आयोग के भर्ती घोटाले में स्टाफ सहित बिचौलियों और बड़ी मछलियों के शामिल होने के सुबूत एसआईटी के हाथ लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इसी कारण सरकार ने कर्मचारी चयन आयोग में बीते वर्ष और इस साल विज्ञापित और दोबारा विज्ञापित किए गए पदों को भरने के लिए चल रही सारी प्रक्रिया को रोक दिया है। गौरतलब है कि डी श्रेणी के लगभग 38 हजार पद भरने के लिए सरकार ने विभागों से पूरा ब्योरा मांग लिया था। जल्द ही इसकी भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश कर्मचारी चयन आयोग को भेजे जाने थे।
4 of 10
कॉलेज स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह से पुलिस व महिला कांस्टेबल के 5500 पदों का दोबारा विज्ञापन देने की फाइल गृह विभाग में मंजूरी के लिए गई हुई थी। वहीं सात हजार पुलिस कर्मी और भर्ती किए जाने की बात डीजीपी बीएस संधू ने बीते सप्ताह ही साझा की है। इन भर्तियों के अलावा सैकड़ों और पदों को भरने की प्रक्रिया भी जारी है। अनेक पदों को पुन विज्ञापित कर आवेदन इस वर्ष के शुरू और बीते वर्ष नवंबर-दिसंबर में मांगे गए हैं। इनके लिए लिखित परीक्षा होनी अभी बाकी है।
5 of 10
कॉलेज स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
डी श्रेणी के पद न भरने से बिगड़ेगा सरकार का गणित
मनोहर सरकार डी श्रेणी के खाली 38 हजार पद भरकर दलितों, पिछड़ों और अन्य वर्गों को खुश करना चाह रही थी। इन पदों में अनुसूचित जातियों और पिछड़ा वर्ग का बड़ा बैकलॉग भी शामिल है। भर्ती घोटाले के कारण इन्हें भरने की प्रक्रिया रुकने से सरकार की योजना पर पानी फिर सकता है। चूंकि 2019 में अक्टूबर से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं और सरकार अगले तीन-चार महीने में अधिकांश पदों को भरने की तैयारी में थी। लेकिन, सब धरा का धरा रह गया। अब नए सिरे से सरकार और भाजपा को रणनीति तैयार करनी पड़ेगी।