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फिर चाहूंगी तापसी के साथ दोबारा काम करना: भूमि पेडनेकर

Tue, 22 Oct 2019 06:58 AM IST
Mishra Mishra मुंबई टीम, अमर उजाला
मुंबई टीम, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Tue, 22 Oct 2019 06:58 AM IST
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bhumi pednekar exclusive interview with amar ujala
Bhumi Pednekar - फोटो : अमर उजाला

हिंदी सिनेमा की चंद सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में भूमि पेडनेकर का नाम शुमार होता है। अपनी हर फिल्म के लिए अलग गेटअप, अलग तेवर और अलग बोली अपनाने वाली भूमि की नई फिल्म सांड की आंख इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है।




सांड की आंख में आपकी और तापसी पन्नू की जोड़ी की तुलना श्रीदेवी-जया प्रदा, माधुरी दीक्षित-ऐश्वर्या राय और दीपिका पादुकोण-प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी से हो रही है। ऐसा कोई दबाव आप भी महसूस करती हैं क्या?
जिन दिग्गज कलाकारों के आपने नाम लिए उनसे हमारी तुलना करना दबाव डालना नहीं बल्कि ये तो सम्मान की बात है। मैं तो तापसी के साथ दोबारा काम करने को लेकर बहुत ही उत्साहित हूं। आगे भी हम साथ में फिल्में करें क्योंकि अच्छे कलाकारों के साथ काम करके वाकई बहुत मज़ा आता है। 

bhumi pednekar exclusive interview with amar ujala
Bhumi Pednekar - फोटो : amar ujala mumbai

कैसा रहा इस उम्र का किरदार निभाना ?
इस किरदार को निभाना बहुत ही कठिन था। जब आप असल ज़िंदगी के किरदारों को परदे पर निभा रहे होते हैं, वह बेहद कठिन होता है। इस तरह के किरदार को निभानी की ज़िम्मेदारी बेहद कठिन होती है। ये दादियां आज भी 80 साल से ऊपर की होने के बाद बावजूद सेहतमंद हैं। उनकी चाल ढाल अपनाना, उनकी भाषा बोलना और उनके तरह ही बोलना बेहद कठिन रहा।
 

bhumi pednekar exclusive interview with amar ujala
Bhumi Pednekar - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
महिला सशक्तीकरण को लेकर आप क्या सोचती हैं?
मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां मुझे हर वक्त समान अवसर प्रदान किए गए हैं। मैने अपने करियर की शुरूआत भी विकसित मानसिकता वाले लोगों के साथ की। इसीलिए मैंने किसी कमी को महसूस नहीं किया। हां कम फीस मिलना और कई सारी अलग चीज़ें जरूर प्रचलित हैं। पर मेरे आस पास ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया है। अब सोच यही होनी चाहिए कि औरत और मर्द एक समान हैं। इन दादियों की कहानी भी इसी बात को दोहराती है।
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bhumi pednekar exclusive interview with amar ujala
Bhumi Pednekar - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

आपने इससे पहले भी बंदूक उठाई है इंदुमती तोमर के किरदार के लिए। क्या उस किरदार ने किसी तरह इस किरदार के लिए मदद की?
नहीं नहीं बिलकुल नहीं, वह कहानी बिलकुल अलग थी, यह एक खेल की कहानी है। पिस्टल शूटिंग और राइफल चलाने में बहुत अंतर है। इस खेल में बहुत स्थिरता की जरूरत होती है।

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