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Year Ender 2024: हाइपरसोनिक मिसाइल से लेकर नारी शक्ति वंदन तक, आत्मनिर्भर बन रहा भारत; सेना बनी और शक्तिशाली

Sun, 29 Dec 2024 07:25 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 29 Dec 2024 07:25 AM IST
सार

साल 2024 में रक्षा के मोर्चे पर कई ऐसी घटनाएं हुईं जो 'इतिहास में पहली बार' श्रेणी में दर्ज हो गईं। पूरा साल देश को मिली महत्वपूर्ण उपलब्धियों और सफलताओं के नाम रहा। भारत को मजबूत, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पूरी ताकत झोंक दी। एक नजर 2024 की ऐतिहासिक घटनाओं पर

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Year Ender 2024 From Hypersonic Missiles to Drones Know India Military Power Grows Under Atmanirbhar Bharat
2024 में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भता की तरफ मजबूती से बढ़े भारत के कदम - फोटो : अमर उजाला
साल 2024 अपने अंतिम पड़ाव पर है। चंद दिनों बाद पूरा देश नव वर्ष 2025 में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने में जुट जाएगा। दिसंबर बीते लगभग 52 हफ्तों में हासिल उपलब्धियों को याद करने का महीना होता है। हमें बीते वक्त में 'क्या खोया-क्या पाया' जैसे सवाल के सहारे पूरे साल का पुनरावलोकन करने का मौका मिलता है। इस आलेख में हम बात रक्षा मंत्रालय या डिफेंस के क्षेत्र में कायम हुए मील के पत्थरों की बात करेंगे। कामयाबी के गौरवबोध के साथ बात उस आत्मविश्वास की भी करेंगे, जो आत्मनिर्भता के कारण आती है। दरअसल, 21वीं सदी का भारत हाइपरसॉनिक मिसाइलों से लेकर 'अभ्यास' ड्रोन तक खुद विकसित कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत देश की तीनों सेनाएं शक्तिशाली बन रही हैं। महिला सैन्य अधिकारियों को पहली बार कुछ शीर्ष पदों पर नियुक्त किया जाना, नारी शक्ति वंदन का उदाहरण है। जानिए बीते एक साल यानी 360 से अधिक दिनों में देश रक्षा क्षेत्र में कितना आत्मनिर्भर बना, कौन सी ऐसी उपलब्धियां हैं जो उल्लेखनीय हैं। अपार संभावनाओं से भरे देश भारत में कौन सी ऐसी घटनाएं हुईं जो ऐतिहासिक रहीं।
Year Ender 2024 From Hypersonic Missiles to Drones Know India Military Power Grows Under Atmanirbhar Bharat
रक्षा मंत्रालय ने कितना बजट कैसे खर्च किया, 2024 की कुछ झलकियां - फोटो : अमर उजाला

अब भारत में किन ताकतवर जहाजों का विकास

नौसेना स्वदेशी तौर पर अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रही है। इनमें शक्तिशाली विमानवाहक पोत विक्रांत, विशाखापत्तनम क्लास के घातक विध्वंसक, बहुमुखी नीलगिरि क्लास फ्रिगेट्स, गुप्त कलवरी क्लास पनडुब्बियां, फुर्तीला शैलो वॉटर एएसडब्ल्यू क्राफ्ट या विशेष डाइविंग सपोर्ट वेसल्स भी शामिल हैं।

54 मंत्रालयों में सबसे अधिक पैसा रक्षा मंत्रालय को

अब क्योंकि वर्तमान दौर में आर्थिक पहलू किसी भी फैसले को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, हम पुनरावलोकन की शुरुआत सबसे पहले देश के रक्षा बजट से करते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 का रक्षा बजट लगभग 6,21,941 करोड़ रुपए का रहा। खास बात यह है कि भारत सरकार के 54 मंत्रालयों और 93 विभागों में रक्षा मंत्रालय को सबसे अधिक फंड आवंटित किया गया। केंद्र सरकार के कुल खर्च का लगभग 13 फीसदी हिस्सा रक्षा मंत्रालय को दिया गया।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने का निर्णय

डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम (DAP) में बदलाव भी साल 2024 का प्रमुख फैसला रहा। डीएपी में संशोधन का निर्णय नवंबर, 2023 में हुआ था, लेकिन इस साल इस फैसले का कार्यान्वयन और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ा। इस फैसले के तहत किसी भी रक्षा अधिग्रहण में कम से कम 50 फीसदी सामग्री / मशीनरी स्वदेशी होगी, इसे सुनिश्चित करना है।
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2024 इन दोनों महिला सैन्य अधिकारियों की शीर्ष पदों पर नियुक्ति के कारण भी खास वर्ष रहा - फोटो : अमर उजाला
साल की शुरुआत होते ही जनवरी में रक्षा मंत्रालय ने एक और मील का पत्थर छुआ जब केवल बालिकाओं के लिए देश का पहला सैनिक स्कूल खुला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 01 जनवरी, 2024 को उत्तर प्रदेश में देश के ऐसे पहले पूर्ण सैनिक स्कूल- संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया। मथुरा के वृन्दावन में बालिकाओं के लिए इस विद्यालय में 870 सीटें हैं जहां शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

ले.जन. साधना सक्सेना को पहली महिला सैन्य अधिकारी होने का गौरव
इसी साल अगस्त महीने में सेना में महिलाओं की अग्रणी भूमिका भी सामने आई। लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर देश की सेना में चिकित्सा सेवा विंग की पहली महिला महानिदेशक बनीं। ले. जन. साधना ने 1 अगस्त, 2024 को पदभार ग्रहण किया। उन्हें इस प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी होने का गौरव भी हासिल हुआ। इससे पहले उन्होंने अस्पताल सेवा (सशस्त्र बल) महानिदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। ले. जन. साधना को एयर मार्शल पद पर पदोन्नति के बाद महानिदेशक नियुक्त किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे दिसंबर, 1985 में आर्मी मेडिकल कोर में नियुक्त हुईं। सराहनीय सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति ने एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी वायु कमान और चीफ ऑफ एयर स्टाफ कमेंडेशन के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया है।

वाइस एडमिरल आरती सरीन बनीं पहली DGAFMS महानिदेशक
अक्तूबर के महीने में एक बार फिर रक्षा क्षेत्र में आधी आबादी ने दस्तक दी। सेना के चिकित्सा क्षेत्र की यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि आजाद भारत में सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा के महानिदेशक का पद पहली बार एक महिला ने संभाला। शल्य चिकित्सक वाइस एडमिरल आरती सरीन महानिदेशक बनने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बनीं। उन्होंने सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) की महानिदेशक का पदभार 01 अक्तूबर को संभाला। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली इकाई- DGAFMS, सशस्त्र बलों से संबंधित समग्र चिकित्सा नीति के मामले देखती है। 46वें डीजीएएफएमएस के रूप में पदभार संभालने से पहले डॉ सरीन ने दिसंबर 1985 में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में पहला कार्यभार संभाला था। लगभग 38 साल के सेवाकाल में वे कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुकी हैं। वाइस एडमिरल आरती सरीन को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं में सेवा करने का दुर्लभ गौरव भी हासिल है।
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आईएनएस संध्याक के भारतीय नौसेना में शामिल होने के अवसर पर नौसेना प्रमुख और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : एएनआई

80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी आईएनएस संध्याक की सौगात

इसी साल फरवरी में देश को पहला सर्वेक्षण विशाल मालवाहक जहाज (एसवीएल)- आईएनएस संध्याक भी मिला। 'संध्याक' का अर्थ है विशेष खोज करने वाला। इसमें लागत के हिसाब से 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। आईएनएस संध्याक की मदद से देश के निजी समुद्री हितों के साथ-साथ मित्र देशों के हितों की भी रक्षा भी हो सकेगी। आईएनएस संध्याक समुद्री डकैती और तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मदद करेगा। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आईएनएस संध्याक (यार्ड 3025) नौसेना को सौंपने के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, यह जहाज हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत करेगा। इस मौके पर आत्मनिर्भर भारत का जिक्र करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बताया कि 66 जहाजों और पनडुब्बियों के आर्डर में से 64 का निर्माण कार्य भारतीय शिपयार्ड में किया जा रहा है। इसका मतलब  नौसेना इस क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
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रक्षा मंत्रालय कैसे आत्मनिर्भता के संकल्प को कर रहा साकार, कुछ मिसालों पर एक नजर - फोटो : अमर उजाला

आत्मनिर्भरता की नजर से नए युग की शुरुआत

इसी साल मार्च में भारत के पहले स्वदेश निर्मित 1500 हार्सपावर इंजन का परीक्षण भी हुआ। मुख्य युद्धक टैंकों के लिए विकसित इस इंजन का पहला परीक्षण कर्नाटक के बीईएमएल मैसूरू में किया गया। भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने वाले इस मौके पर तत्कालीन रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने इसे नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने इसे तकनीकी कौशल के साथ ही रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की प्रतिबद्धता करार दिया। 20 मार्च, 2024 को 1500 एचपी का यह इंजन सेना की प्रोपल्शन सिस्टम का हिस्सा बना। इसकी मदद से उंचाई वाले स्थानों, शून्य से नीचे तापमान और रेगिस्तानों सहित कठिन परिस्थितियों में भी युद्धक टैंकों का संचालन किया जा सकेगा। भारत के पहले स्वदेश- निर्मित 1500 हार्सपावर (एचपी) इंजन की पहली टेस्ट फायरिंग  भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के मैसुरू परिसर स्थित इंजन विभाग में की गई।

पहली बार सरकारी अस्पताल में हियरिंग इम्प्लांट

इस साल अप्रैल महीने में रणक्षेत्र में पराक्रम दिखाने के अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में भी रक्षा मंत्रालय को उल्लेखनीय कामयाबी मिली। 10 अप्रैल को पुणे का कमांड अस्पताल सफल पीजोइलेक्ट्रिक बोन कंडक्शन हियरिंग इम्प्लांट करने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बना। इस अस्पताल के कान, नाक और गला (ईएनटी) विभाग में कान के बाहरी एवं मध्य हिस्सों में जन्मजात गंभीर विसंगतियों की वजह से होने वाली श्रवण हानि से पीड़ित 7 वर्षीय बच्चे और कान के बहरेपन (एसएसडी) के शिकार वयस्क में दो पीजोइलेक्ट्रिक बोन कंडक्शन हियरिंग इम्प्लांट (बीसीआई) किए गए।

एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण

14 अप्रैल को एक और स्वदेशी तकनीक भी सामने आई। इस दिन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित की गई मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया। इसमें एमपीएटीजीएम, लॉन्चर, लक्ष्य अधिग्रहण प्रणाली और अग्नि नियंत्रण इकाई शामिल हैं। 13 अप्रैल, 2024 को राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसका परीक्षण किया गया।

स्वदेशी तकनीक से निर्मित क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण

18 अप्रैल को ओडिशा के तट पर स्वदेशी तकनीक से निर्मित क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। यह प्रक्षेपास्त्र उन्नत एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर से लैस है। इसी साल 19 अप्रैल को डीआरडीओ की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने स्वदेशी लीडिंग एज एक्टयूएटर्स और एयरब्रेक कंट्रोल मॉड्यूल तैयार किया। एलसीए तेजस एमके1ए के लिए विकसित इस तकनीक का पहला बैच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौंपा जा चुका है। सरकार ने इसे वैमानिकी प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। सबसे पहले 83 हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए में इनका इस्तेमाल किया जाएगा।
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