यूपी चुनाव में भले ही पीएम नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव और राहुल गांधी स्टार प्रचारक रहे हों, लेकिन इस बार अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव का जलवा भी कम नहीं रहा। 'भाभी' के रूप में स्टार प्रचारक के तौर पर सामने आईं डिंपल बड़े बड़े दिग्गजों पर भारी रहीं। उनकी रैलियों में जबरदस्त भीड़ उमड़ी। हालांकि डिंपल खुद चुनाव नहीं लड़ रही थीं, लेकिन उनकी रैली में जुटती भीड़ ने विरोधियों को हैरत में डाल दिया। वैसे डिंपल के अलावा भी कई भाभियां हैं, जो राजनीति में अपनी पहचान बुलंद कर रही हैं। आइए डालते हैं उन पर एक नजर।
डिंपल भाभी ही नहीं, ये भाभियां भी दे रही हैं बड़े-बड़े नेताओं को टक्कर
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1-अपर्णा यादव (लखनऊ कैन्टोमैन्ट)
इन सभी हाईप्रोफाइल चेहरों में सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा हैं अपर्णा यादव। 26 साल की अपर्णा मुलायम सिंह यादव की बहू हैं और राजधानी की प्रतिष्ठित सीट लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में हैं। अपर्णा यादव बीजेपी की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। अपर्णा ने अन्तरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति में परास्नातक की डिग्री ली है। वो उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने पीएम मोदी के साथ सेल्फी खींची थी।
ये 11 चर्चित भाभियां दे रही हैं बड़े-बड़े नेताओं को टक्कर
2- स्वाति सिंह (सरोजनी नगर, लखनऊ)
स्वाति सिंह बीजेपी के पूर्व उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं। उन्हीं दयाशंकर की जिन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में बीजेपी ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन बाद में स्वाति ने जिस तरह बसपा नेताओं और मायावती को मुंहतोड़ जवाब दिया उसने उन्हें पार्टी में लोकप्रिय बना दिया। फिलहाल स्वाति राज्य में पार्टी की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष हैं।
ये 11 चर्चित भाभियां दे रही हैं बड़े-बड़े नेताओं को टक्कर
3- माधुरी वर्मा, ननपुरा (बहराइच)
पूर्व एमएलए दिलीप वर्मा ने अपनी पत्नी माधुरी वर्मा को बहराइच से राजनीति में उस वक्त एंट्री कराई जब वो जेल में थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2012 में बहराइच की सीट से जीत दर्ज की थी। वक्त ने करवट ली तो इस बार वे ननपुरा विधानसभा सीट से बीजेपी की प्रत्याशी हैं।
ये 11 चर्चित भाभियां दे रही हैं बड़े-बड़े नेताओं को टक्कर
4- परमिला धर त्रिपाठी (हंडिया, भदोई)
परमिलाधर त्रिपाठी बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी हैं। राकेशधर आय से अधिक संपत्ति के मामले में पिछले महीने ही जमानत पर जेल से बाहर आए हैं। राकेश ने 2014 लोकसभा चुनाव बीएसपी के टिकट से लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया गया। परमिला धर अपना दल के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। संयोग से वह अपने बेटे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं जो हंडिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।