अटल बिहारी वाजपेयी
देश के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर वक्ता, कवि, पत्रकार और करोड़ों लोगों के दिल पर राज करने वाले राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होने खुद को कभी किसी खास विचारधारा के पहरेदार के रूप में स्थापित नहीं होने दिया। अटल बिहारी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन में भी लगे रहे।
भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका थी। वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। लेकिन वे आज भी लोगों और अपने प्रशंसकों के जेहन में अमर हैं। अटल बिहारी की जितनी बड़ी शख्सियत है उतना ही साधारण स्वभाव था। यही कारण है कि उनकी अंतिम यात्रा में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई दिग्गज नेता पैदल चल कर गए थे। उन्होंने समावेशी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए बखूबी गठबंधन सरकार चलाई थी।
जमाल खशोगी
जमाल खशोगी सऊदी अरब के चर्चित पत्रकारों में से एक थे। जिनकी मृत्यु इस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में हुई थी। इनका जन्म 13 अक्टूबर 1958 को सऊदी अरब के धार्मिक शहर मदीना में हुआ था। उन्होंने 1983 में अमेरिका की इंडिआना विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसके बाद वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए।
जमाल खशोगी को 2003 में सऊदी अरब के सबसे चर्चित अखबार अल-वतन का संपादक चुना गया। लेकिन अपने क्रांतिकारी विचारों के चलते वे ज्यादा दिन तक पद पर नहीं टिक सके थे। शायद इसी क्रांतिकारी विचारों ने उनकी मौत को रहस्य बना दिया। लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार को सम्मान देते हुए टाइम मैगजीन ने 2018 के पर्सन ऑफ द ईयर के लिए चुना है।
जॉर्ज एच डब्लू बुश
अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्लू बुश की मृत्यु 30 नवंबर 2018 को टेक्सस में हो गई थी, उनकी उम्र 94 वर्ष थी। अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने चीन में अमेरिकी राजदूत के तौर पर काम किया था। वह 1989 से 1993 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे।
उससे पहले वह 1981 से 1989 तक अमेरिका के उपराष्ट्रपति भी रहे। बुश के शासन में 1991 में अमेरिका ने गल्फ युद्ध जीता था। इसी वर्ष 17 अप्रैल को उनकी पत्नी बारबरा बुश का भी 92 साल की उम्र में निधन हुआ था। बुश अमेरिका के दूसरे ऐसे जीवित राष्ट्रपति रह चुके थे जिन्होंने अपने बेटे को भी देश का राष्ट्रपति बनते देखा है।
एम करुणानिधि
एम. करुणानिधि भारत के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे, जिन्होने 7 अगस्त 2018 को शाम 6:10 पर आखरी सांसे लीं। राज्य की डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुराई की मौत के बाद पार्टी प्रमुख बने। राजनीतिक जीवन में करुणानिधि ने कभी भी हार का मुंह नहीं देखा।
मात्र 14 वर्ष की आयु में करुणानिधि ने राजनीति में प्रवेश किया और और 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे। करुणानिधि तमिल सिनेमा के नाटककार और पटकथा लेखक भी रहे थे। 1957 में हुए चुनाव में वो पहली बार विधायक बने, जिसके बाद करुणानिधि ने राजनीति के क्षेत्र में जमकर पसीना बहाया और 1967 के चुनावों में पार्टी ने बहुमत हासिल किया
त्रान दाई क्वांग
वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग का 61 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। जब क्वांग के निधन की खबर आई तो पूरा वियतनाम गमगीन हो गया था। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। गौरतलब है कि क्वांग अप्रैल 2016 में राष्ट्रपति के पद पर नियुक्त हुए थे। इससे पहले वो पब्लिक सिक्योरिटी मंत्री थे। 11 सितंबर को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के दौरे के वक्त वह आखिरी बार दिखे थे। उस वक्त देखा जा सकता था कि वो उस समय बीमार दिख रहे थे।