15 अगस्त को देश 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, वहीं देश के कोने-कोने में इसे फहराया जाएगा। हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकेयानंद ने की थी। इसके वर्तमान स्वरूप को 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था।
आगे आप पढ़िए तिरंगे के बारे में 15 फैक्ट...
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां हैं। सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी और ये तीनों समानुपात में हैं। ध्वज की चौड़ाई और लंबाई का अनुपात 2:3 का है।
सफेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का एक अशोक चक्र है। इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तिल्लियां है।
झंडे के बीच में सम्राट अशोक का धर्म चक्र है। इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से इसे लिया गया है। इसका आशय गतिशील जीवन से है। इसके रुकने का अर्थ मौत है।
बताया जाता है कि साल 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सत्र के दौरान आंध्रप्रदेश के एक युवक ने महात्मा गांधी को एक झंडा दिया था। यह लाल और हरे रंग में था। लाल रंग हिंदू समुदाय और हरा रंग मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था। इसे देखकर महात्मा गांधी ने सुझाव दिया कि शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।