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फिल्म शूटिंग की तरह मैनेज होती हैं राहुल की खाट सभा, स्पेशल टीम रटाती है किसानों को सवाल

Fri, 23 Sep 2016 04:07 PM IST
पंकज प्रसून
पंकज प्रसून Updated Fri, 23 Sep 2016 04:07 PM IST
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Rahul Gandhi Khat sabha managed by Prashant Kishor team
- फोटो : Getty Images
देवरिया में राहुल गांधी की सभा में खाट लूट के बाद प्रशांत किशोर की टीम ने सबकुछ मैनेज कर लिया है। मीडिया में भले ही खबरें आ रही हो कि राहुल गांधी की सभाओं में खाट लूट का सिलसिला जारी है, लेकिन ये खाट सभा बहुत कायदे से मैनेज की गई है। जैसे, फिल्म की शूटिंग चल रही हो। इसका आयोजन करने के लिए पार्टी के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की टीम इवेंट मैनेजमेंट की तरह काम करती है। वैसे तो सभा किसानों के लिए होती है, लेकिन सब कुछ पहले से निर्धारित होता है। 

 

कुछ भी छुपाया नहीं जाता

Rahul Gandhi Khat sabha managed by Prashant Kishor team
- फोटो : Getty Images
सभा में आने वालों को लेवल वन, टू और थ्री की श्रेणी में बांटा जाता है। राहुल गांधी से सवाल-जवाब करने वाले लेवल वन और टू वाले होते हैं। थ्री लेवल के लोग दर्शक दीर्घा में रहते हैं। लेवल वन और लेवल टू वालों को बैठने के लिए मोढ़ा (लकड़ी और कुशन का बना छोटा स्टूल) दिया जाता है और लेवल थ्री वालों को खाट। मजे की बात यह है कि पूरी कार्यवाही पारदर्शी होती है। कुछ भी छिपाया नहीं जाता है।

सवाल वही, जो पीके टीम समझाए

Rahul Gandhi Khat sabha managed by Prashant Kishor team
- फोटो : Getty Images
राहुल की खाट सभा जहां भी होती हैं, पीके की टीम वहां पर एक सप्ताह पहले ही पहुंच जाती है। फिर शुरू होती है उन लोगों की खोज जो राहुल के सामने बिना अपना दिमाग लगाए वही सवाल करें, जो पीके टीम उन्हें सिखाए। कौन सवाल कैसे पूछना, कितनी देर तक बोलना है और कितना बोलना है, यह सब पहले से तय रहता है। 
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सवाल पूछने का रिहर्सल

Rahul Gandhi Khat sabha managed by Prashant Kishor team
- फोटो : Getty Images
पीके टीम के मेंबर लेवल वन और लेवल टू वाले इन किसानों को सभा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले ही मंच पर बुला लेते हैं। फिर हर 15 मिनट बाद उसी सवाल को पूछने का रिर्हसल भी कराया जाता है। लेवल थ्री का कार्ड ज्यादातर बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों को दिया जाता है। 
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सभा में बंटता है पानी का पाउच

Rahul Gandhi Khat sabha managed by Prashant Kishor team
- फोटो : Getty Images
पीके की टीम में पांच से छह सदस्य होते हैं। मंच का आकार, पास बनाने का काम, किसानों के चयन का काम यही करते हैं। सभा में कोई भी प्यासा न रहे इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए टीम के सदस्य समय-समय पर पानी के पाउच बांटते रहते हैं। किस लेवल का किसान कहां बैठेगा और कौन किसके बाद सवाल करेगा, यह भी मंच से ही पुकारा जाता है।
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