भले ही आपको यह सवाल कुछ अटपटा सा लगे, मगर है सच। आजाद भारत में आज भी कई जगह ऐसी हैं, जहां कुछ भी करने के लिए ब्रिटेन की इजाजत लेनी होती है। यदि आप उस जगह का फोटो अपने मोबाइल कैमरे में कैद करना चाहते हैं, वहां पौधा लगाने की इच्छा है या अपने किसी परिचित की याद को लंबे समय तक संजोकर रखना चाहते हैं तो ये सब आप नहीं कर सकते। इसके लिए आपको ब्रिटेन सरकार के पास आवेदन करना होगा। मंजूरी मिली तो ठीक अन्यथा बैठे रहिये।बताया गया है कि भारत में ऐसी 330 जगह हैं, जहां विदेशी हुकूमत की चलती है।
भारत में ऐसी कौन सी जगह हैं, जहां कुछ करने के लिए ब्रिटेन की इजाजत लेनी पड़ती है...
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दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हुई कोहिमा वॉर इतिहास में खास स्थान रखती है।इसमें जापानी फौज और आजाद हिंद फौज ने ब्रिटिश आर्मी पर अटैक किया था।करीब 27 सौ ब्रिटिश सैनिक मारे गए, जिनमें 1420 इसाई और मुस्लिम थे। हिंदू और सिखों की संख्या 917 थी। जापानी सेना जो कि बर्मा से आई थी, ने चिंडविन नदी पर यू आकार में हमला कर दिया। उस वक्त डीसी का निवास रहे गेरिसन हिल पर दोनों तरफ की सेनाओं के बीच जोरदार लड़ाई हुई। उनके टेनिस कोर्ट को कब्रगाह का रुप दे दिया गया।बर्मा की 14 आर्मी के कमांडर मार्शल सर विलियम स्लिम ने खुद इस कब्रगाह की बनावट का जायजा लिया।
नेता जी सुभाष संस्था के पदाधिकारी तमाल सान्याल जो कि यहां के प्रशासन से बातचीत करने के लिए बनारस से कोहिमा आए हुए हैं; का कहना है कि इस तरह की कब्रगाह कई दूसरे देशों में भी हैं। जैसे, आस्ट्रेलिया में तीन, कनाडा में पांच, भारत 330 और ब्रिटेन में 1082 कब्रगाह हैं। इन सभी जगहों पर ब्रिटेन सरकार का ही नियंत्रण है।ब्रिटिश नेशनल म्यूजियम ने 2013 में बैटल ऑफ कोहिमा-इम्फाल को बड़ी लडाई की संज्ञा दी है। इन सभी कब्रगाहों की देखरेख 'कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन' करता है।सान्याल के मुताबिक, अगर यहां कोई व्यक्ति अपने मोबाइल से फोटो लेना चाहता है तो उसकी इजाजत ब्रिटेन सरकार से लेनी होगी।
पिछले साल कब्रगाह के साथ से गुजर रही सड़क को चौड़ी करने के लिए इंग्लैंड सरकार से परमिशन मांगी गई थी, जो नहीं मिली।इसी तरह अगर कोई भारतीय यहां आकर अपने किसी जानकार सैनिक की कब्रगाह की साफ-सफाई या उस पर पत्थर आदि लगवाना चाहता है तो उसे इंग्लैंड सरकार से मंजूरी लेनी होगी। सान्याल का कहना है कि भारत को ये सभी कब्रगाह अपने कब्जे में ले लेने चाहिए।इसके लिए वे केंद्र सरकार के साथ पत्राचार कर रहे हैं।
कोहिमा की लड़ाई के दौरान मेजर ऐजरा रोड सहित छह सैनिक एक टैंक में सवार थे।चारों तरफ से फायरिंग हो रही थी।टैंक पहाड़ी पर चढ़ गया।इससे पहले कि वे आगे बढ़ते, टैंक पीछे की ओर लुढ़क गया।यह घटना छह मई 1944 की है।जिस जगह पर वह टैंक गिरा, वहां किसी वस्तु के बोझ से मशीन गन का ट्रिगर दब गया।मशीन गन घूमते हुए फायरिंग करती रही।इसी कवर फायर की मदद से टैंक में मौजूद सभी सैनिक सुरक्षित बाहर निकल गए।