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एसपी मुकुल की मां बोलीं, मुझे 20 लाख नहीं मेरा बेटा चाहिए

Fri, 03 Jun 2016 02:39 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 03 Jun 2016 02:39 PM IST
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'Mujhe paise nhi chahiye,CM mera beta lakar de'
मथुरा के हजारीबाग इलाके में हुई हिंसा में शहीद हुए एसपी मुकुल‌ द्विवेदी - फोटो : ANI
उत्तर प्रदेश में मथुरा के जवाहरबाग इलाके में हुई हिंसा में शहीद हुए एसपी मुकुल‌ द्विवेदी की मां ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कहा कि मुझे पैसे नही चाहिए, सीएम मेरा बेटा लाकर दे दें। मुकुल की मां का रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि हमसे 20 लाख रुपए ले लें, पर मेरा बेटा वापस कर दें।    

'मुझे पैसे नहीं चाहिए, सीएम मेरा बेटा लाकर दे दें'

'Mujhe paise nhi chahiye,CM mera beta lakar de'
मुकुल की मां का रो रोकर बुरा हाल - फोटो : ANI
सर्वेश मिश्रा, एसपी पश्चिम, लखनऊ ने बताया कि पहले मथुरा में अपने मुकुल के बुरी तरह घायल होने की जानकारी मिली। कुछ देर बाद और बुरी खबर आई कि मुकुल की मौत हो गई। वह हम सबको छोड़कर दुनिया से चले गए। मैं सन्न रह गया। ज्ञान शून्य हो गया।
 

मुझे पैसे नहीं चाहिए, सीएम मेरा बेटा लाकर दे दें'

'Mujhe paise nhi chahiye,CM mera beta lakar de'
दो छोटे बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे और क्या करेंगे - फोटो : ANI
मुझे तो यह सोचकर ही रोना आ रहा है कि उनके दो छोटे बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे और क्या करेंगे। उन्हें अपना हंसमुख पापा कहां मिलेगा। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि दोस्त की कमी को कैसे भुला पाऊंगा। वह बहुत बहादुर थे। मिलनसार भी। बहादुरी दिखाते हुए उनकी जान गई। वह मेरे बैचमेट थे। पिछले साल ही उन्हें पदोन्नति मिली थी।
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मुझे पैसे नहीं चाहिए, सीएम मेरा बेटा लाकर दे दें'

'Mujhe paise nhi chahiye,CM mera beta lakar de'
औरेया के विधूना के मूल निवासी मुकुल प्रदेश के डीजीपी रहे एमसी द्विवेदी के भतीजे थे - फोटो : ANI
औरेया के विधूना के मूल निवासी मुकुल प्रदेश के डीजीपी रहे एमसी द्विवेदी के भतीजे थे। पर बड़े अफसर के घर से होने के बावजूद साथियों के साथ उनका कभी ऐसा व्यवहार नहीं दिखा जिससे लगे कि वह किसी बड़े पुलिस अफसर के घर वाले हैं। वे मेरठ, सहारनपुर और बरेली जैसी चुनौती भरी जगहों पर तैनात रहे थे। हम लोग एक ही बैच में थे।
 
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'Mujhe paise nhi chahiye,CM mera beta lakar de'
लीडरशिप की क्वालिटी मुकुल में शुरू से ही दिखाई देती थी - फोटो : ANI
लीडरशिप की क्वालिटी मुकुल में शुरू से ही दिखाई देती थी। कई मोर्चों पर वह आगे होकर लड़ते थे। दुख और कष्ट के साथ कहना पड़ रहा है कि उनके इसी गुण ने शायद उनको असमय मौत के मुंह में धकेल दिया। तनाव तो उनके चेहरे पर कभी दिखता ही नहीं था। उनकी तैनाती वाली जगहों पर जब कभी कहीं माहौल खराब होने की जानकारी मिलती तो वे सबसे पहले रिलेक्स भाव से वहां पहुंच जाते।
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