गणपति महोत्सव में कई दिनों तक घरों में रहने के बाद भगवान गणेश विदा ले रहे हैं। ये एक ऐसा त्योहार है जिसे भारत के कई हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी कुछ दिनों के लिए भक्तों के घर आकर उनके सभी दुखों को अपने साथ ले जाते हैं।
भारत ही नहीं थाईलैंड, जापान जैसे देशों में भी पूजे जाते हैं गणेश
ऐसा नहीं है कि गणेश जी सिर्फ भारत में ही पूजे जाते हैं बल्कि देश से बाहर भी गणेश जी अलग-अलग नामों और स्वरुपों में पूजे जाते हैं। जापान, चीन, थाईलैंड तिब्बत ऐसे पड़ोसी देश हैं जहां गणेश जी को पूजा जाता है।
भारत ही नहीं थाईलैंड, जापान जैसे देशों में भी पूजे जाते हैं गणेश
जापान
जापान में गणेश जी कों कंगनितन के नाम से जाना जाता है जो कि जापानी बुद्ध धर्म का हिस्सा हैं। कंगनितन का जापान में कई स्वरूप हैं लेकिन सबसे ज्यादा प्रचलित है दो शरीरों वाला स्वरूप। इसके अलावा जापान में 4 हाथों वाले गणेश जी का स्वरूप भी प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि जापान में 8वीं-9वीं सदी में गणेश जी का पूजन शुरू हुआ।
भारत ही नहीं थाईलैंड, जापान जैसे देशों में भी पूजे जाते हैं गणेश
तिब्बत
भारतीय बौद्ध भिक्षु अतिसा दीपंकर श्रीजना और गयाधरा ने ग्यारहवीं सदी में तिब्बतियन बौद्ध धर्म में गणेश जी को प्रचारित किया। इन्हें ही तिब्बत में गणेश पंथ को शुरू करने वाला माना जाता है। गयाधरा कश्मीर से थे जिन्होंने तिब्बत में गणेश पथ को प्रचारित किया।
भारत ही नहीं थाईलैंड, जापान जैसे देशों में भी पूजे जाते हैं गणेश
थाईलैंड
थाईलैंड में गणेश जी फ़िरा फिकानेत के नाम से जाने जाते हैं। यहां उन्हें परेशानियों को दूर करने वाला और सफलता का देवता माना जाता है। इन्हें यहां नए व्यापार और विवाह के अवसर पर प्रमुख रूप से पूजा जाता है।