जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का मुखर चेहरा और बीते कुछ साल से गाहे-बगाहे खबरों में बने रहने का हुनर। मिलिए, कन्हैया कुमार से। आज वो बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार हैं। उनके सामने हैं भाजपा के दिग्गज गिरिराज सिंह। इस बार कन्हैया पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले हैं। छात्र राजनीति से सीधे देश के सबसे बड़े चुनाव में शिरकत। आगे की तस्वीरों में देखिए कैसा रहा कन्हैया का सियासी सफर।
चौथी कक्षा के भाषण से शुरू हुआ था कन्हैया का सफर, अब बेगूसराय से सबसे बड़े महासंग्राम में उतरे
कन्हैया का जन्म 13 जनवरी 1987 को बिहार के बेगूसराय जिले में हुआ था। कन्हैया के पिता का नाम जयशंकर सिंह और मां का नाम मीना देवी हैं। कन्हैया की मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। कन्हैया शुरूआत से ही इतने सक्रिय छात्र रहे कि उनकी मां उन्हें बचपन से ही नेता कहती हैं। स्कूल के दिनों में, अभिनय में रूचि रखने वाले कन्हैया इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएशन के सदस्य भी रह चुके हैं।
कन्हैया की छात्र राजनीति की शुरूआत साल 2002 से ही हो गई थी जब उन्होंने पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया था। पटना से उन्होंने भूगोल में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। पटना में पढ़ाई के दौरान कन्हैया, ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के सदस्य बने और छात्र राजनीति में कदम रखा था। एआईएसएफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का छात्र विंग है। कन्हैया ने इसी साल जेएनयू से अपनी पीएचडी पूरी की है। राजनीति में एंट्री हो जाने के बावजूद कन्हैया शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
पटना में पोस्ट ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद, कन्हैया ने जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज के लिए पीएचडी में एडमिशन लिया। इसी दौरान 2015 में कन्हैया जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने वाले एआईएसएफ के पहले सदस्य बने। इस चुनाव में उन्होंने एआईएसए, एबीवीपी, एसएफआई और एनएसयूआई के उम्मीदवारों को हरा कर जीत हासिल की थी।
इस बार भी कन्हैया कुमार दावा करते हैं कि भले ही यह उनका विश्वविद्यालय नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव है, मगर जमीनी स्तर पर बेगूसराय में उनकी पार्टी यानी सीपाआई सबसे ज्यादा मजबूत है।
कन्हैया एक मुखर वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं। वो जब चौथी कक्षा में थे तब उन्होंने भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया था जिसमें उन्हें श्रेष्ठ वक्ता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके भाषण का विषय था, 'ममतामयी मां मदर टेरेसा'। और संयोग से जेएनयू में दिए गए अपने भाषण के बाद कन्हैया को जेल के जिस वॉर्ड में रखा गया था उसका नाम भी 'मदर टेरेसा वॉर्ड' था।
जेएनयू में उनके जानने वाले बताते हैं कि विश्वविद्यालय में चुनावों के एक दिन पहले भी कन्हैया ने दमदार भाषण दिया था। माना जाता है कि उनका भाषण इतना असरदार था कि अगले दिन वही उनकी जीत का कारण बन गया।