लोकसभा चुनाव में बिहार की भागलपुर सीट पर मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के शैलेश कुमार ऊर्फ बूलो मंडल तथा जदयू के अजय मंडल के बीच है। साल 2014 में भाजपा के शाहनवाज हुसैन मोदी लहर में भी यहां कमल नहीं खिला पाए थे, जिसका खामियाजा उन्हें इस बार टिकट कटने के रूप में भुगतना पड़ा। इस तरह भागलपुर में लोकसभा चुनाव के दौरान ‘मंडल फैक्टर’ मुख्य हो गया है। 1989 के बाद यह पहली बार है, जब भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर यहां उम्मीदवारी से बाहर है।
बिहार की इस सीट पर मंडल बनाम मंडल, 30 साल में पहली बार मैदान से गायब हुआ 'कमंडल'
साल 1989 में जनता दल से चुनचुन प्रसाद यादव, जबकि कांग्रेस से भगवत झा आजाद चुनाव लड़े थे। 1989 तक भाजपा दौड़ से बाहर रही थी। साल 1991 में बिजॉय कुमार मित्रा भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनावी मैदान में उतरे और 11 फीसदी वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। इस बार चुनचुन प्रसाद जनता दल से एक बार फिर विजयी हुए। 1996 में भी जीते चुनचुन ही, लेकिन प्रभाष चंद्र तिवारी भाजपा का वोट फीसदी(17%) बढ़ाने में कामयाब रहे थे और 1998 में उन्होंने आखिरकार जीत का स्वाद चखा। 1999 में प्रभाष सीपीएम के सुबोध सिंह से हार गए। साल 2004 में भाजपा की ओर से सुशील कुमार मोदी और 2009 में शाहनवाज हुसैन भागलपुर के सांसद बने। इस बार गठबंधन के समीकरण में तीर कमल पर भारी पड़ गया और सीट जदयू के खाते में चली गई।
इस सीट का एक जमाने में प्रतिनिधित्व कर चुकीं कांग्रेस और भाजपा इस चुनाव में सहयोगी दल की भूमिका में हैं। हालांकि किसी भी गठबंधन की जीत में इन दोनों दलों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सैयद शाहनवाज हुसैन करीब नौ हजार वोटों के अंतर से राजद के बुलो मंडल से हार गए थे। जदयू ने इस बार नाथनगर के अपने विधायक अजय मंडल को टिकट दिया है।
बुलो मंडल का कहना है कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनविरोधी हैं। मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता से जो भी वादे किए थे, सब जुमले साबित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक वर्ष दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने, विदेशों से कालाधन वापस लाकर प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में 15-15 लाख रुपए जमा कराने और महंगाई कम करने जैसे प्रमुख वादे पूरे नहीं किये गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों की बात करने वाले लालू यादव को षड्यंत्र के तहत जेल में बंद किया गया है।
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडे ने कहा कि राजग गठबंधन एक इकाई के रूप में काम कर रहा है, सभी एकजुट हैं और नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिये पूरी ताकत से काम कर रहे हैं।
साल 1952 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट, पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के तहत थी। 1975 में आपातकाल से पहले इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। इस सीट पर 1957, 1962, 1967 और 1971 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में समीकरण बदल गए। भारतीय लोकदल के उम्मीदवार डॉ. रामजी सिंह ने कांग्रेस के भागवत झा आजाद को हरा दिया था। आपातकाल के बाद कांग्रेस इस सीट पर सिर्फ दो बार जीत सकी। 1998 में हुए चुनाव में भागलपुर सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वर्ष 1999 में हुए आम चुनाव में भाजपा चुनाव हार गई। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री भागवत झा आजाद भागलपुर सीट से पांच बार सांसद चुने गए।