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देश की पहली दृष्टिहीन महिला आईएएस प्रांजल ने संभाला सब-कलेक्टर का पद

Mon, 14 Oct 2019 02:06 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवंतपुरम Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 14 Oct 2019 02:06 PM IST
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Kerala Pranjal Patil India first visually challenged woman IAS as Sub Collector Thiruvananthapuram
भारत की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस प्रांजल पाटिल - फोटो : ANI

भारत की पहली दृष्टिहीन आईएएस अधिकारी प्रांजल पाटिल ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सब-कलेक्टर का पद संभाला। उनके कार्यालय पहुंचने पर लोगों ने उनका स्वागत किया। लोगों द्वारा उन्हें फूलों के गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया। प्रांजल महाराष्ट्र के उल्हासनगर से ताल्लुक रखती हैं। साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की, जिसमें उनकी 773 वीं रैंक थी।

Kerala Pranjal Patil India first visually challenged woman IAS as Sub Collector Thiruvananthapuram
महिला आईएएस प्रांजल पाटिल - फोटो : ANI

प्रांजल जब सिर्फ छह साल की थी जब उनके एक सहपाठी ने उनकी एक आंख में पेंसिंल मारकर उन्हें घायल कर दिया था। उसके बाद प्रांजल की उस आंख की दृष्टि खराब हो गई थी। उस समय डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को बताया था कि हो सकता है कि भविष्य में वे अपनी दूसरी आंख की दृष्टि भी खो दें और दुर्भाग्य से डॉक्टरों की बात सच साबित हुई। कुछ समय बाद प्रांजल की दोनों आंखों की दृष्टि चली गई। 



 

Kerala Pranjal Patil India first visually challenged woman IAS as Sub Collector Thiruvananthapuram
आईएएस प्रांजल पाटिल - फोटो : ANI

प्रांजल के माता-पिता ने कभी भी उनकी नेत्रहीनता को उनकी शिक्षा के बीच आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने मुंबई के दादर में स्थित नेत्रहीनों के स्कूल में प्रांजल का दाखिला कराया। प्रांजल ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा भी बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की और 12वीं में चाँदीबाई कॉलेज में कला संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

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Kerala Pranjal Patil India first visually challenged woman IAS as Sub Collector Thiruvananthapuram
आईएएस प्रांजल पाटिल - फोटो : ANI

प्रांजल ने एक साक्षात्कार में बताया था कि 'मैं हर रोज उल्हासनगर से सीएसटी जाया करती थी। सभी लोग मेरी मदद करते थे, कभी सड़क पार करने में, कभी ट्रेन मे चढ़ने में। बाकी कुछ लोग कहते थे कि मुझे उल्हासनगर के ही किसी कॉलेज में पढ़ना चाहिए पर मैं उनको सिर्फ इतना कहती कि मुझे इसी कॉलेज में पढ़ना है और मुझे हर रोज आने-जाने में कोई परेशानी नहीं है।'
 

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