उत्तराखंड में आज एक बड़ा हादसा हो गया। केदारनाथ धाम से लौट रहे श्रद्धालुओं का हेलीकॉप्टर गरुड़चट्टी में क्रैश हो गया। हादसे की जगह केदारनाथ धाम से सिर्फ दो किलोमीटर दूर है। इसमें पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई। हादसे का कारण खराब मौसम बताया जा रहा है।
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ऐसे में आज हम आपको केदारनाथ धाम की हेलीकॉप्टर यात्रा से जुड़ी हर जानकारी बताएंगे। आखिर कैसे लोग हेलीकॉप्टर की यात्रा करते हैं? इसके लिए टिकट कैसे मिलता है? नियम क्या होते हैं? यात्रा के दौरान आसमान से कैसा नजारा होता है? आइए जानते हैं...
1. केदारनाथ धाम जाने के लिए कितने विकल्प?
केदारनाथ धाम जाने के लिए यात्रियों के पास अभी तीन तरह के विकल्प होते हैं। पहला पैदल यात्रा, दूसरा खच्चर या घोड़े से और तीसरा हेलीकॉप्टर से। अब बात हेलीकॉप्टर की करते हैं। हेलीकॉप्टर की सुविधा चार जगहों से मिलती है। पहला देहरादून से सीधे केदारनाथ धाम, दूसरा गुप्तकाशी, तीसरा फाटा और चौथा सिरसी से।
2. कहां-कहां बने हैं हेलीपैड?
देहरादून का हेलीपैड शास्त्रधार में बना हुआ है। यहां से केदारनाथ की दूसरी 254 किलोमीटर की है। देहरादून से उड़ने वाला हेलीकॉप्टर पहले फाटा हेलीपैड पर उतरता है। इसमें करीब 38 मिनट का समय लगता है। फाटा केदारनाथ से 17 किलोमीटर दूर है। यहां से यात्रियों को दूसरे हेलीकॉप्टर के जरिए केदारनाथ धाम ले जाया जाता है। केदारनाथ पर बना हेलीपैड मंदिर से करीब 700-1000 मीटर दूर है। देहरादून से केदारनाथ धाम तक हेलीकॉप्टर की यात्रा काफी महंगी होती है। यही कारण है कि ज्यादातर यात्री फाटा से ही हेलीकॉप्टर पकड़ते हैं। गुप्तकाशी से केदारनाथ धाम की दूरी करीब 23 किलोमीटर है। हेलीकॉप्टर से यात्रा करने में करीब 15 मिनट लगते हैं। सिरसी में बना हेलीपैड केदारनाथ के सबसे नजदीक है। यहां से 11 मिनट में यात्री केदारनाथ पहुंच जाता है। नौ कंपनियों के करीब नौ हेलीकॉप्टर इसके लिए लगाए गए हैं।
3. कितने तरह का टिकट मिलता है?
हेलीकॉप्टर का टिकट तीन तरह का मिलता है। पहला एक ही दिन में जाना और वापस आना, दूसरा यात्री जाते हेलीकॉप्टर से हैं और फिर रात में केदारनाथ धाम में रुकते हैं और अगले दिन वापस आते हैं, जबकि तीसरा सिर्फ जाने का टिकट होता है। कुछ विशेष परिस्थिति में सिर्फ वापसी का टिकट भी दिया जाता है।
4. टिकट की बुकिंग कैसे होती है?
आमतौर पर यात्रियों को दो तरह से टिकट मिलते हैं। इसके लिए ऑनलाइन सुविधा दी गई है। यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो जाती है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग करते हैं। दूसरा ऑफलाइन मोड में टिकट दिया जाता है। ये गढ़वाल मंडल विकास निगम के कार्यालय में वितरित किया जाता है। हालांकि, इसकी संख्या कम होती है। इसमें वीवीआईपी यात्री भी शामिल होते हैं, जिनका अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों, राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रोटोकॉल जारी होता है।