भारत का स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए-नेवी) सोमवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर उतरा। नौसेना ने इसे ऐतिहासिक रूप से मील का पत्थर बताया है। नौसेना ने कहा कि उसके पायलटों ने इसकी लैंडिंग की।
ऐतिहासिक पल: INS विक्रांत पर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की लैंडिंग, नौसेना के पायलटों ने रचा कीर्तिमान
नौसेना के पायलटों ने आईएनएस- विक्रांत पर हल्के लड़ाकू विमान की सफल लैंडिंग की। स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक पोत डिजाइन, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
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'आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर किया हासिल'
HISTORIC: Visuals of LCA Navy and MiG29K jets making first landings/takeoff on INS Vikrant pic.twitter.com/REAEE7akTK
नौसेना की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया, भारतीय नौसेना ने 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया, नौसेना के पायलटों ने आईएनएस विक्रांत पर एलसीए की लैंडिंग की। इसमें कहा गया है कि स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक पोत डिजाइन, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
'विमान वाहक बनाने वाले राष्ट्रों के समूह में शामिल हुआ भारत'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में भारत के पहले स्वदेशी निर्मित विमान वाहक आईएनएस विक्रांत (आईएसी आई) को कमीशन किया, जिसने देश को 40,000 टन से अधिक श्रेणी के विमान वाहक बनाने में सक्षम राष्ट्रों के एक विशिष्ट समूह का हिस्सा बना दिया।
'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता में निभाएगा अहम भूमिका'
इससे पहले नौसेना ने कहा था कि विमानवाहक पोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में भूमिका निभाने में सक्षम होगा।
'आईएनएस विक्रांत से दोगुनी हो जाएगी नौसेना की ताकत'
पीएम मोदी ने बीते साल सितंबर में कोच्चि में देश के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित किया था। कोचीन शिपयार्ड पर तैयार किए गए इस विमान वाहक पोत के निर्माण में 20,000 करोड़ रुपये की लागत आई। इस पोत के आधिकारिक तौर पर शामिल होने से नौसेना की ताकत दोगुनी हो जाएगी।