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HAL Tejas Navy on INS Vikramaditya, LCA Navy Specification, About Indigenous HAL LCA Aircraft
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जल्द विक्रमादित्य पर तैनात होगा 'स्वदेशी रक्षक', चीन-पाक के 'थंडरबर्ड' को पलक झपकते कर देगा खत्म
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 13 Jan 2020 11:37 AM IST
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आईएनएस विक्रमादित्य पर एलसीए नेवी
- फोटो : Deb Rana
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नौसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए नेवी) ने रविवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के स्काई-जंप डेक से सफलतापूर्वक उड़ान भरकर और उतरकर इतिहास रच दिया। ऐसे कुछ परीक्षणों के बाद आईएनएस विक्रमादित्य पर इस विमान को तैनात किया जा सकता है।
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एलसीए नेवी की आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान
- फोटो : India Navy Twitter
चीन-पाकिस्तान के संयुक्त युद्धाभ्यास को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अरब सागर में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य को तैनात किया था। इस युद्धपोत के डेक से स्वदेशी विमान एलसीए नेवी का उतरना और उड़ान भरना चीन-पाक के लिए बड़ा संदेश है।
विक्रमादित्य पर उतरना क्यों है बड़ी कामयाबी
गोवा स्थित नौसेना के बेस आईएनएस हंसा में बनाए गए विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के प्रोटोटाइप से एलसीए नेवी ने कई बार उड़ान भरकर और लैंड कर अपनी तैयारियों को मुकम्मल किया था। लेकिन समुद्र में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर उतरना अपने आप में साहसिक कदम है।
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एलसीए नेवी की आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान
- फोटो : India Navy Twitter
जब लड़ाकू विमान का पायलट विमानवाहक पोत पर लैंडिंग की कोशिश करता है तो उसे तेज हवा से जूझने के साथ रुकने के लिए जमीन की अपेक्षा दसवां हिस्सा ही होता है। अगर पायलट सही समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया या रोकने के लिए लगाए गए वायर में फंस नहीं सका तो वह समुद्र में गिर सकता है।
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आईएनएस विक्रमादित्य पर लैंडिंग वायर में फंसा एलसीए नेवी
- फोटो : India Navy Twitter
इसके अलावा फाइटर पायलट को पूरी स्पीड के साथ विमान के डेक को छूना होता है। जिससे यदि वायर न फंस सके या ब्रेक काम न करे तो वह फिर से उड़ान भर सके। ऐसी स्थिति में पायलट का अनुभव ही काम आता है। एनसीए नेवी के लिए यह काम अनुभवी टेस्ट पायलट जयदीप मावलंकर ने किया।
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