नौसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए नेवी) ने रविवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के स्काई-जंप डेक से सफलतापूर्वक उड़ान भरकर और उतरकर इतिहास रच दिया। ऐसे कुछ परीक्षणों के बाद आईएनएस विक्रमादित्य पर इस विमान को तैनात किया जा सकता है।
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एलसीए नेवी की आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान
- फोटो : India Navy Twitter
चीन-पाकिस्तान के संयुक्त युद्धाभ्यास को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अरब सागर में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य को तैनात किया था। इस युद्धपोत के डेक से स्वदेशी विमान एलसीए नेवी का उतरना और उड़ान भरना चीन-पाक के लिए बड़ा संदेश है।
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आईएनएस हंसा से उड़ान भरता एलसीए नेवी
- फोटो : DRDO
विक्रमादित्य पर उतरना क्यों है बड़ी कामयाबी
गोवा स्थित नौसेना के बेस आईएनएस हंसा में बनाए गए विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के प्रोटोटाइप से एलसीए नेवी ने कई बार उड़ान भरकर और लैंड कर अपनी तैयारियों को मुकम्मल किया था। लेकिन समुद्र में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर उतरना अपने आप में साहसिक कदम है।
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एलसीए नेवी की आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान
- फोटो : India Navy Twitter
जब लड़ाकू विमान का पायलट विमानवाहक पोत पर लैंडिंग की कोशिश करता है तो उसे तेज हवा से जूझने के साथ रुकने के लिए जमीन की अपेक्षा दसवां हिस्सा ही होता है। अगर पायलट सही समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया या रोकने के लिए लगाए गए वायर में फंस नहीं सका तो वह समुद्र में गिर सकता है।
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आईएनएस विक्रमादित्य पर लैंडिंग वायर में फंसा एलसीए नेवी
- फोटो : India Navy Twitter
इसके अलावा फाइटर पायलट को पूरी स्पीड के साथ विमान के डेक को छूना होता है। जिससे यदि वायर न फंस सके या ब्रेक काम न करे तो वह फिर से उड़ान भर सके। ऐसी स्थिति में पायलट का अनुभव ही काम आता है। एनसीए नेवी के लिए यह काम अनुभवी टेस्ट पायलट जयदीप मावलंकर ने किया।