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शिव भक्त राहुल गांधी और मोहन भागवत के मुस्लिम प्रेम का कनेक्शन
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 04 Oct 2018 01:47 PM IST
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rahul gandhi-mohan bhagwat
राहुल गांधी शिव भक्ति में लीन हैं। राहुल गांधी की इस भक्ति पर भाजपा कटाक्ष कर रही है। भाजपा के नेता कांग्रेस अध्यक्ष की इस आस्था को उनका पाखंड बता रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को मुसलमान काफी प्रिय लगने लगे हैं। विज्ञान भवन में तीन दिन की व्याख्यान माला में मोहन भागवत ने गुरू गोलवरकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' में बदलाव को स्वीकार करते हुए हिन्दुत्व में मुसलमान को समाहित कर लिया है। आखिर कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस विचारधारा में बदलाव का कनेक्शन क्या है?
इस हंसी का मतलब क्या है?
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय और राहुल देव का कहना है कि राहुल गांधी मुस्लिम परस्ती की छवि से कांग्रेस को ऊबारने के लिए यह सब कर रहे हैं। लेकिन राम बहादुर राय इस सवाल पर हंस देते हैं कि आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत भी तो राष्ट्रीय सेक्युलर संघ के प्रमुख हो गए हैं। उन्होंने भी गुरू गोलवरकर की किताब में बदलाव कर दिया है।
इस पर राय का कहना है कि राहुल गांधी की आरएसएस प्रमुख से तुलना नहीं की जा सकती। संघ एक बहुत बड़ा संगठन है। राहुल देव मानते हैं कि हां, संघ ने अपने भीतर बदलाव किया है। संघ ने अपने भीतर खुलापन लाया है।
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हालांकि राहुल देव का कहना है कि इंद्रेश कुमार जैसे संघ के प्रचारक काफी समय से मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन यह एक बड़ा वैचारिक बदलाव है। देव के अनुसार इसे संघ की निचली ईकाई तक आने में समय लग सकता है।
राहुल देव एक कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि संघ का यह बदलाव सर संघचालक का विचार नहीं है, बल्कि यह संघ की आधिकारिक नीति में परिवर्तन है। इसके लिए संघ एकजुट है।
कांग्रेस और आरएसएस दोनों में बदलाव?
इस सवाल से कांग्रेस के नेता असहमत हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी की विचारधारा उदार और वसुधैव कुटुम्बकम् पर आधारित रही है। कांग्रेस के मुताबिक पार्टी ने हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सबको बराबर का महत्व देकर भारत की अनेकता में एकता को स्थान दिया है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला इसकी पुरजोर वकालत करते हैं। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. गौरव और पार्टी के सचिव विनीत पुनिया की भी यही राय है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के पुराने दिग्गज नेताओं से लेकर वर्तमान तक किसी की आस्था पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता।
पंडित जवाहर लाल नेहरू कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और उन्होंने हमेशा मंदिर, साधु, संत का आदर किया। मुसलमान समेत सभी संप्रदायों, धर्मों का सम्मान किए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव ने भी इस परंपरा को निभाया। कांग्रेस अध्यक्ष भी इसी परंपरा के अनुयायी हैं।
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इस हंसी का मतलब क्या है?
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय और राहुल देव का कहना है कि राहुल गांधी मुस्लिम परस्ती की छवि से कांग्रेस को ऊबारने के लिए यह सब कर रहे हैं। लेकिन राम बहादुर राय इस सवाल पर हंस देते हैं कि आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत भी तो राष्ट्रीय सेक्युलर संघ के प्रमुख हो गए हैं। उन्होंने भी गुरू गोलवरकर की किताब में बदलाव कर दिया है।
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इस पर राय का कहना है कि राहुल गांधी की आरएसएस प्रमुख से तुलना नहीं की जा सकती। संघ एक बहुत बड़ा संगठन है। राहुल देव मानते हैं कि हां, संघ ने अपने भीतर बदलाव किया है। संघ ने अपने भीतर खुलापन लाया है।
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हालांकि राहुल देव का कहना है कि इंद्रेश कुमार जैसे संघ के प्रचारक काफी समय से मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन यह एक बड़ा वैचारिक बदलाव है। देव के अनुसार इसे संघ की निचली ईकाई तक आने में समय लग सकता है।
राहुल देव एक कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि संघ का यह बदलाव सर संघचालक का विचार नहीं है, बल्कि यह संघ की आधिकारिक नीति में परिवर्तन है। इसके लिए संघ एकजुट है।
कांग्रेस और आरएसएस दोनों में बदलाव?
इस सवाल से कांग्रेस के नेता असहमत हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी की विचारधारा उदार और वसुधैव कुटुम्बकम् पर आधारित रही है। कांग्रेस के मुताबिक पार्टी ने हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सबको बराबर का महत्व देकर भारत की अनेकता में एकता को स्थान दिया है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला इसकी पुरजोर वकालत करते हैं। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. गौरव और पार्टी के सचिव विनीत पुनिया की भी यही राय है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के पुराने दिग्गज नेताओं से लेकर वर्तमान तक किसी की आस्था पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता।
पंडित जवाहर लाल नेहरू कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और उन्होंने हमेशा मंदिर, साधु, संत का आदर किया। मुसलमान समेत सभी संप्रदायों, धर्मों का सम्मान किए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव ने भी इस परंपरा को निभाया। कांग्रेस अध्यक्ष भी इसी परंपरा के अनुयायी हैं।
संघ और कांग्रेस का बदलाव स्वागत योग्य
Mohan Bhagwat
राहुल देव संघ और कांग्रेस पार्टी की विचारधारा में आए बदलाव का स्वागत कर रहे हैं। संघ की विचारधारा में मुसलमान को सम्मान का राम बहादुर राय भी स्वागत कर रहे हैं। दोनों का मानना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के भविष्य के लिए यह बदलाव अच्छा है।
राहुल देव कहते हैं कि कांग्रेस और संघ की विचार धारा के बदलाव का मध्य अच्छा है। इसका सीधा अर्थ है कि अब देश में एकपक्षीय वोट बैंक की राजनीति नहीं चलेगी। यह बदल रहे समय की तरफ इशारा कर रही है।
कांग्रेस ने संघ के मत को किया खारिज
इसके जवाब में कांग्रेस के नेता दोनों पत्रकारों के विश्लेषण को खारिज कर देते हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस जैसी थी, वैसी है, वैसी ही रहेगी। हमारे मूल विचार में कोई बदलाव नहीं है। पार्टी हर भारतीय धर्म, भाषा, लोग और उससे मानने वालों का आदर करती आई है, कर रही है और करती रहेगी।
कांग्रेस पार्टी के हर बड़े नेता का कहना है कि दोहरे मानदंड पर जीना आरएसएस और भाजपा का चरित्र है।
क्या राहुल गांधी के सामने है संघ से मुकाबले की चुनौती?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सार्वजनिक मंच से हिंदू, हिंदूत्व और केवल हिंदू धर्म की बात नहीं करते। उनके आस-पास से इसकी आवाज उठती है। हाल में प्रधानमंत्री इंदौर में मस्जिद में भी गए थे।
वहीं संघ प्रमुख मोहन मागवत ने हिंदुत्व में मुसलमान को समाहित करते हुए राम मंदिर निर्माण के राग पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके सामानांतर राहुल गांधी मंदिर, देवालय जाकर हिंदू धर्म की अलख जगा रहे हैं। हालांकि राहुल रोजा इफ्तार का आयोजन करते हैं, मस्जिदों और अन्य पूजा स्थलों में भी जाते हैं।
तो क्या कांग्रेस अध्यक्ष (विचार) के सामने संघ प्रमुख मोहन भागवत (विचार) से मुकाबले की चुनौती है?
राहुल देव कहते हैं कि कांग्रेस और संघ की विचार धारा के बदलाव का मध्य अच्छा है। इसका सीधा अर्थ है कि अब देश में एकपक्षीय वोट बैंक की राजनीति नहीं चलेगी। यह बदल रहे समय की तरफ इशारा कर रही है।
कांग्रेस ने संघ के मत को किया खारिज
इसके जवाब में कांग्रेस के नेता दोनों पत्रकारों के विश्लेषण को खारिज कर देते हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस जैसी थी, वैसी है, वैसी ही रहेगी। हमारे मूल विचार में कोई बदलाव नहीं है। पार्टी हर भारतीय धर्म, भाषा, लोग और उससे मानने वालों का आदर करती आई है, कर रही है और करती रहेगी।
कांग्रेस पार्टी के हर बड़े नेता का कहना है कि दोहरे मानदंड पर जीना आरएसएस और भाजपा का चरित्र है।
क्या राहुल गांधी के सामने है संघ से मुकाबले की चुनौती?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सार्वजनिक मंच से हिंदू, हिंदूत्व और केवल हिंदू धर्म की बात नहीं करते। उनके आस-पास से इसकी आवाज उठती है। हाल में प्रधानमंत्री इंदौर में मस्जिद में भी गए थे।
वहीं संघ प्रमुख मोहन मागवत ने हिंदुत्व में मुसलमान को समाहित करते हुए राम मंदिर निर्माण के राग पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके सामानांतर राहुल गांधी मंदिर, देवालय जाकर हिंदू धर्म की अलख जगा रहे हैं। हालांकि राहुल रोजा इफ्तार का आयोजन करते हैं, मस्जिदों और अन्य पूजा स्थलों में भी जाते हैं।
तो क्या कांग्रेस अध्यक्ष (विचार) के सामने संघ प्रमुख मोहन भागवत (विचार) से मुकाबले की चुनौती है?
गड्ढे में गिरेंगे राहुल : देव और राय
Rahul Gandhi
राहुल देव और राम बहादुर राय दोनों का कहना है कि राहुल गांधी (कांग्रेस) ऐसा होते देना कभी नहीं चाहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष कभी लड़ते हुए भी नहीं दिखना चाहेंगे। राय का कहना है कि राहुल गांधी के पार्टी की जो विचारधारा है, उसपर बने रहें तो उनकी भविष्य की राजनीति के लिए अच्छा रहेगा।
2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का आंकलन करके राम बहादुर राय कहते हैं कि जिस दिन राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी का स्वरूप बनेगा, राहुल गांधी गड्ढे में जाकर गिरेंगे।
राहुल देव की राय भी यही है। देव कहते हैं कि संघ की विचारधारा से मुकाबले का मुगालता कांग्रेस अध्यक्ष पाल सकते हैं, लेकिन हमें ऐसा नहीं है। संघ एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक रचनाधर्मी अद्वितीय संगठन है। उसकी तुलना एक राजनीतिक दल से नहीं की जा सकती। राहुल गांधी का व्यावहारिक बदलाव, विचारधारा परिवर्तन सच्चा है या नहीं।
यह वैचारिक है या रणनीतिक, इसे साबित होना बाकी है। राहुल गांधी को 2019 में सत्ता में आने के लिए हिंदुत्व की जरूरत है, लेकिन संघ की विश्वसनीयता को लेकर इस तरह का कोई संकट नहीं है। संघ ने अपनी विचारधारा में बदलाव काफी गंभीर मंथन के बाद किया है।
2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का आंकलन करके राम बहादुर राय कहते हैं कि जिस दिन राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी का स्वरूप बनेगा, राहुल गांधी गड्ढे में जाकर गिरेंगे।
राहुल देव की राय भी यही है। देव कहते हैं कि संघ की विचारधारा से मुकाबले का मुगालता कांग्रेस अध्यक्ष पाल सकते हैं, लेकिन हमें ऐसा नहीं है। संघ एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक रचनाधर्मी अद्वितीय संगठन है। उसकी तुलना एक राजनीतिक दल से नहीं की जा सकती। राहुल गांधी का व्यावहारिक बदलाव, विचारधारा परिवर्तन सच्चा है या नहीं।
यह वैचारिक है या रणनीतिक, इसे साबित होना बाकी है। राहुल गांधी को 2019 में सत्ता में आने के लिए हिंदुत्व की जरूरत है, लेकिन संघ की विश्वसनीयता को लेकर इस तरह का कोई संकट नहीं है। संघ ने अपनी विचारधारा में बदलाव काफी गंभीर मंथन के बाद किया है।