जिंदगी में खुश रहने के लिए कभी-कभी बस एक छोटी-सी वजह काफी होती है। सुबह की चाय के साथ कोई मजेदार बात सुनने को मिल जाए, ऑफिस में किसी दोस्त की हाजिरजवाबी पर हंसी छूट जाए या घर पर बैठकर पुराने किस्से याद आ जाएं, तो दिन अपने आप अच्छा लगने लगता है। रोजमर्रा की भागदौड़ में ऐसी छोटी-छोटी खुशियां बहुत मायने रखती हैं। हर दिन एक जैसा नहीं होता, लेकिन अगर बीच-बीच में हंसने का मौका मिल जाए, तो मुश्किल काम भी थोड़े आसान लगने लगते हैं।
देसी जोक्स: जज ने वकील से पूछा इतनी फीस क्यों ली, जवाब सुनकर हंसी रोकना होगा मुश्किल
Desi Jokes: जज और वकील के ये मजेदार जोक्स अदालत की काल्पनिक बातचीत, दलीलों और हाजिरजवाबी पर आधारित हैं। इनके अनोखे जवाब पढ़कर आप मुस्कुरा सकते हैं और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच कुछ पल मनोरंजन का आनंद ले सकते हैं।
जज - वकील साहब, आपने अपने मुवक्किल से इतनी फीस क्यों ली?
वकील - हुजूर, मैंने उनका केस बहुत मेहनत से लड़ा है।
जज - लेकिन केस तो हार गए!
वकील - हुजूर, फीस जीतने की नहीं, मेहनत करने की थी!
जज - गवाह साहब, आपको घटना की तारीख याद है?
गवाह - जी हुजूर, बिल्कुल याद है।
जज - और समय?
गवाह - वो भी याद है।
वकील - फिर आपको बाकी बातें याद क्यों नहीं हैं?
गवाह - साहब, मैं गवाह हूं, कैलेंडर और घड़ी दोनों नहीं!
जज - वकील साहब, आपकी दलील का आधार क्या है?
वकील - हुजूर, मेरा आधार है कि मेरे मुवक्किल निर्दोष हैं।
जज - और इसका सबूत?
वकील - हुजूर, अगर सबूत मेरे पास होता, तो मैं इतनी लंबी दलील क्यों देता!
जज - वकील साहब, आप हर तारीख पर अगली तारीख क्यों मांगते हैं?
वकील - हुजूर, न्याय में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
जज - तो फिर आज ही फैसला क्यों न सुना दूं?
वकील - हुजूर, न्याय में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए, लेकिन इतनी भी नहीं कि मेरी अगली तारीख की तैयारी बेकार हो जाए!
(डिस्क्लेमर- इस कैटिगरी में लगाए गए जोक्स और चुटकुले वॉट्सऐप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल कंटेंट से लिए गए हैं। इनका मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना है। हमारा उद्देश्य किसी जाति, धर्म, मत, नस्ल, रंग या लिंग के आधार पर किसी का उपहास उड़ाना या उसे नीचा दिखाना या किसी पर टीका-टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं है)