{"_id":"5feb07028ebc3e3bfe500e0f","slug":"ramanand-sagar-birthday-special-here-you-know-his-painful-struggle-and-success-story","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"संघर्ष से भरा रहा रामायण बनाने वाले रामानंद सागर का जीवन, कभी साबुन बेचे तो कभी किया चपरासी का काम","category":{"title":"Television","title_hn":"छोटा पर्दा","slug":"television"}}
संघर्ष से भरा रहा रामायण बनाने वाले रामानंद सागर का जीवन, कभी साबुन बेचे तो कभी किया चपरासी का काम
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Tanuja Yadav
Updated Tue, 29 Dec 2020 04:15 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
ramanand sagar
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लगे हुए लॉकडाउन के दौरान रामानंद सागर लोगों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस शख्स ने रामायण के जरिए अनूठा इतिहास रचा और सभी की जिंदगी में रस घोला, असल में उनकी खुद की जिंदगी बड़ी ही बेनूर और तकलीफों से भरी हुई थी।
2 of 5
ramanand sagar
- फोटो : file photo
रामानंद सागर का जन्म लाहौर के पास असल गुरू में हुआ था। कई दशक पहले उनके परदादा लाहौर से कश्मीर आकर बस गए थे। रामानंद सागर का असली नाम चंद्रमौली चोपड़ा था, लेकिन जब उनकी नानी ने उन्हें गोद लिया तो उनका नाम बदलकर रामानंद सागर रख दिया। रामानंद सागर का परिवार लाहौर के धनी परिवारों में से एक माना जाता था। जब विभाजन हुआ तो रामानंद सागर के परिवार को अपना जमा-जमाया व्यापार और सारी प्रॉपर्टी छोड़कर कश्मीर आना पड़ा। यहीं से रामानंद सागर के परिवार के मुफलिसी और परेशानी भरे दिन शुरू हुए।
3 of 5
Ramanand Sagar
- फोटो : social media
विभाजन के समय भारत आने की वजह से रामानंद सागर के परिवार के पास पैसों की कमी हो गई थी। पैसों की कमी के चलते उनके पास पढ़ाई के लिए पैसे बमुश्किल बचते थे और उनको शिक्षा ग्रहण करने में दिक्कत आने लगी। इसके बाद रामानंद सागर ने एक चपरासी के तौर पर काम करना शुरू किया। इस नौकरी से उनके पास कुछ पैसे आने लगे थे। इसके बाद रामानंद सागर ने ट्रक क्लीनर से लेकर साबुन बेचने और सुनार का भी काम किया। रामानंद सागर दिन में ये सब काम करते थे और रात में पढ़ाई करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
रामानंद सागर
- फोटो : social media
रामानंद सागर ने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते रहे। रामानंद सागर के जीवन में टर्निंग प्वाइट तब आया, जब उन्होंने मुंबई मायानगरी का रुख किया। उन्होंने फिर 'रेडर्स ऑफ द रेल रोड' नाम की मूक फिल्म में एक क्लैपर बॉय के तौर पर करियर की शुरुआत की। इसके बाद रामानंद सागर ने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर काम किया था। राज कपूर की फिल्म बरसात की कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा। रामानंद सागर ने कई हिट फिल्में दीं और टीवी इंडस्ट्री से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक तहलका मचा दिया।
विज्ञापन
5 of 5
रामानंद सागर
- फोटो : सोशल मीडिया
रामानंद सागर की रामायण को आए करीब 33 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी उसका जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। उनकी रामायण में अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया ने राम-सीता का किरदार निभाया है। बाद में लोग इन्हें सच में राम-सीता समझने लगे थे।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।