Sadashiv Amrapurkar: 'बॉलीवुड की महारानी' बन खूब छाए सदाशिव अमरापुरकर, इस अभिनेता के लिए बने 'लकी विलेन'
सदाशिव अमरापुर का डायलॉग बोलने का खास तरीका था। वह जिस किरदार में होते, उसी अंदाज में डायलॉग बोलते। विलेन के रूप में उनकी आवाज में क्रूरता साफ नजर आती। साल 1983 में आई यह सदाशिव अमरापुरकर की पहली हिंदी फिल्म 'अर्धसत्य' थी।
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एक कलाकार अपने हिस्से आए किरदार को कितनी खूबसूरती से निभाता है, इसी में उसकी काबिलियत होती है। फिर चाहें वह किरदार हीरो का हो या विलेन का। इंडस्ट्री में कई ऐसे अभिनेता हुए हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी के बूते हीरो की बराबर या कहें हीरो से भी ज्यादा लाइमलाइट लूटी है। ऐसे ही एक कलाकार थे सदाशिव अमरापुरकर। उन्होंने खलनायक की भूमिका ऐसे निभाई कि लोगों को सच में उनसे नफरत हो जाए। यही उनकी सफलता रही। आज सदाशिव अमरापुरकर की बर्थ एनिवर्सरी है। आइए जानते हैं
मराठी फिल्म से किया डेब्यू
सदाशिव अमरापुरकर का जन्म 11 मई 1950 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ था। उनके करीबी लोग प्यार से उन्हें 'तात्या' कहते थे। सदाशिव अमरापुरकर ने अपने एक्टिंग के सफर की शुरुआत मराठी नाटकों से की थी। करीब 50 नाटकों में काम करने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में दस्तक दी। सदाशिव अमरापुरकर ने मराठी फिल्म से फिल्मी करियर शुरू किया, इसमें उन्होंने बाल गंगाधर तिलक का किरदार अदा किया। फिल्म का नाम था '22 जून 1897'।
आवाज में झलकती थी क्रूरता
सदाशिव अमरापुर का डायलॉग बोलने का खास तरीका था। वह जिस किरदार में होते, उसी अंदाज में डायलॉग बोलते। विलेन के रूप में उनकी आवाज में क्रूरता साफ नजर आती। साल 1983 में आई यह सदाशिव अमरापुरकर की पहली हिंदी फिल्म 'अर्धसत्य' थी। वर्ष 1984 में उन्हें 'अर्धसत्य' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के अवॉर्ड से नवाजा गया। फिल्म में सदाशिव अमरापुरकर के साथ-साथ अमरीश पुरी, स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह थे।
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'जिस्म के बाजार की महारानी' बन छाए
सदाशिव ने ‘हुकूमत’ (1987), 'एलान-ए-जंग' (1989), 'सड़क' (1991), 'छोटे सरकार' (1996) जैसी फिल्मों के जरिए खुद को साबित किया। 'सड़क' में सदाशिव अमरापुरकर ने एक किन्नर महारानी का किरदार निभाया था, जो लोगों को काफी पसंद आया। इसके बाद उन्हें 'बॉलीवुड की महारानी' कहा जाने लगा। 'सड़क' के लिए बेस्ट विलेन का अवॉर्ड दिया गया। इस फिल्म में अमरापुरकर का डायलॉग 'मैं हूं इस जिस्म के बाजार का महाराजा और नाम है महारानी' छा गया था। सदाशिव ने धर्मेंद्र, गोविंदा, अमिताभ बच्चन, आमिर खान, संजय दत्त और सलमान खान समेत कई बड़े सितारे के साथ काम किया। खलनायक का किरदार निभाने के साथ-साथ उन्होंने कॉमेडी फिल्मों में भी हाथ आजमाया।
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बन गए धर्मेंद्र के पसंदीदा विलेन
बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र को भी सदाशिव अमरापुरकर के कायल रहे। उन्हें अभिनेता का अंदाज इतना पसंद आया कि सदाशिव धर्मेंद्र के अपोजिट उनके पसंदीदा विलेन हो गए। कहा जाता है कि धर्मेंद्र उन्हें अपना 'लकी चार्म' मानने लगे थे। सदाशिव अमरापुरकर उनके साथ दो-चार नहीं बल्कि 11 फिल्मों में नजर आए। विलेन के किरदार से दिल जीत चुके सदाशिव अमरापुरकर ने 90 के दशक में सह कलाकार के रूप में थोड़ा कॉमेडी की तरफ भी रुख किया। सदाशिव की आखिरी हिंदी फिल्म थी दिबाकर बनर्जी की 'बॉम्बे टॉकीज' जिसमें उन्होंने कैमियो रोल किया था। 3 नवंबर 2014 को फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण अभिनेता का निधन हो गया।
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