बॉलीवुड में 70-80 के दशक में चॉकलेटी हीरो के तौर पर मशहूर हुए अभिनेता विनोद मेहरा को गुजरते वक्त के साथ आज की पीढ़ी शायद भूल गई हो। लेकिन एक दौर था जब उनके पास फैन फॉलोइंग की कमी नहीं थी। उन्हें याद करते हुए एक बार फिर उनके फिल्मी सफर पर नजर डालेंगे। लेकिन कहते हैं न कि सिनेमा की दुनिया में कब किसका सितारा जगमगा कर ढल जाए कोई नहीं बता सकता। कुछ ऐसा ही विनोद मेहरा के साथ भी हुआ।
विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी 1945 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उस दौर में विनोद मेहरा की दीदी शारदा फिल्मों में सह अभिनेत्री की भूमिकाएं निभाया करती थीं। विनोद मेहरा की उम्र उस समय महज 13 साल की थी जब उन्हें फिल्म 'रागिनी' में एक बाल कलाकार के रूप में काम करने का मौका मिला था।
कहते हैं विनोद के फिल्मी करियर को मुकाम देने में अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अहम रोल निभाया था। शक्ति सामंत की फिल्म अनुराग (1972) में मौसमी-विनोद पहली बार साथ आए। विनोद मेहरा ने बतौर एक्टर अपने करियर की शुरुआत 1971 में फिल्म 'एक थी रीता' से की थी। विनोद का अपना एक अलग ही स्टाइल था, जिसकी वजह से वह हीरोइनों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उस जमाने की हर एक्ट्रेस विनोद के करीब होना चाहती थी।
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vinod mehra, rekha
- फोटो : file photo
इनमें सबसे पहला नाम रेखा का आता है। दोनों के बीच केमिस्ट्री की खबरें भी उस समय मीडिया की सुर्खियां बनी थीं। रेखा-विनोद की शादी की अफवाहें भी खूब उड़ी थीं। बीबीसी के मुताबिक विनोद मेहरा अपनी मां को रेखा से शादी के लिए नहीं मना पाए थे। जब वो कोलकाता में शादी कर रेखा को सीधे एयरपोर्ट से अपने घर ले गए और रेखा ने विनोद मेहरा की मां कमला मेहरा के पांव छूने चाहे तो उन्होंने उसी वक्त उन्हें धक्का दे दिया। इस तरह ये रिश्ता खत्म हो गया।
इसके बाद 1974 में आई निर्देशक-अभिनेता महमूद की फिल्म ‘कुंवारा बाप’ में विनोद ने गेस्ट अपेयरियंस दी थी। बॉलीवुड में अपनी प्रतिभा को प्रतिष्ठा नहीं मिलने से विनोद अकसर उदास रहने लगे थे। उन्हें कम रोल मिलने लगे थे। जब उन्हें लगा कि ऐसे काम नहीं चलेगा तो वे निर्देशन के तौर पर अपनी किस्मत आजमाने उतर गए। उन्होंने अपने करियर में करीब 100 फिल्मों में काम किया है। इस दौरान वह हीरो के साथ साथ साइड रोल में भी दिखाई दिए।