बॉलीवुड अभिनेता टॉम ऑल्टर ने कई फिल्मों और सीरियल में अंग्रेज का किरदार निभाया लेकिन वह हमारी आपकी तरह दिल से पूरे हिंदुस्तानी थे। उन्होंने अपने फिल्मी सफर में कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों में काम किया था। विदेशी दिखने वाले टॉम ऑल्टर असल में भारतीय मूल के थे। टॉम ऑल्टर का जन्म 22 जून साल 1950 को देहरादून के मसूरी में हुआ था। जन्मदिन के खास मौके पर आज हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातों से रूबरू करवाते हैं।
टॉम ऑल्टर ने अपने पूरे फिल्मी सफर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उन्होंने बंगाली, आसामी, गुजराती, तेलुगू और तमिल भाषा की फिल्मों में भी काम किया। टॉम ऑल्टर ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1976 में आई रामानंद सागर की फिल्म चरस से की थी। इसके बाद उन्होंने कई शानदार कलाकार और निर्देशकों के साथ काम किया।
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टॉम ऑल्टर
- फोटो : सोशल मीडिया
टॉम ऑल्टर के अभिनय की शुरुआत करने वजह भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, उन्हें हिंदी फिल्में देखने का शौक था। एक बार वह अपने किसी दोस्त के साथ राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की फिल्म आराधना देखने गए। इस फिल्म में राजेश खन्ना के अभिनय ने टॉम ऑल्टर काफी प्रेरित किया और उन्होंने पुणे के एफटीआईआई में दाखिला लेने का फैसला किया। वरना वह इससे पहले हरियाणा के एक स्कूल में अध्यापक थे।
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टॉम ऑल्टर
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टॉम ऑल्टर ने भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार सत्यजीत रे की फिल्म में भी काम किया था। वह साल 1977 में शतरंज के खिलाड़ी फिल्म में नजर आए थे। सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित यह फिल्म मुंशी प्रेम चंद की लघुकथा पर आधारित थी। टॉम ऑल्टर की शानदार फिल्में क्रांति, गांधी, राम तेरी गंगा मैली, देश-परदेश, सलीम लंगड़े पे मत रो, कर्मा, परिंदा, आशिकी, जुनून, परिंदा, वीर-जारा, मंगल पांडे थीं। इसके अलावा वह छोटे पर्दे के कई सीरियल्स में भी नजर आए थे। बता दें कि एक्टर टॉम ऑल्टर ने शक्तिमान में महागुरु का किरदार निभाया था।
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टॉम ऑल्टर
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अपनी जिंदगी के आखिरी समय में वह थियेटर से जुड़े रहे। टॉम ऑल्टर थियेटर के क्षेत्र का भी बड़ा नाम बनकर उभरे। विदेशी परिवार में पले-बड़े होने के बावजूद उनकी हिंदी और ऊर्दू भाषा काफी साफ थी। वहीं यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि भारतीय क्रिकेट टीम के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर का टीवी के लिए पहला इंटरव्यू लेने वाली शख्स भी टॉम ऑल्टर ही हैं। उस समय सचिन अपने करियर की शुरुआत में थे।
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टॉम का किताबों टॉम को किताबें पढ़ने का काफी शौक था। कहा जाता है कि वह कभी अपने पास फोन नहीं रखते थे लेकिन उनके हाथ में एक किताब हमेशा होती थीजब समय मिलता था वह किताब पढ़ने लगते थे। उनकी आखिरी शॉर्ट फिल्म का नाम भी किताब था जिसमें वह एक बूढ़े लाइब्रेरियन का किरदार निभाते नजर आए थे। साल 2008 में टॉम ऑल्टर को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वह 29 सितंबर 2017 को इस दुनिया को अलविदा कहकर चले गए थे। उन्हें स्किन कैंसर था।