कहते हैं कि प्यार अंधा होता है, यह न तो उम्र देखता है और न ही जाति या धर्म का बंधन। इसमें तो बस दो दिल एक-दूसरे को इतना चाहने लगते हैं कि जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाते हैं। वैलेन्टाइन वीक के मौके पर अगर दिलीप साहब और सायरा बानो के प्यार का जिक्र न हो तो यह वैलेन्टाइन अधूरा है। आइए बॉलीवुड की किताब के कुछ पन्ने पलटते हैं और गुजरे जमाने के इस मशहूर किस्से के बारे में जानते हैं...
ये 1966 का साल था। दिलीप कुमार और सायरा बानो ने अपने मोहब्बत के ऐलान का फैसला कर लिया था। दिलीप कुमार पर वैसे तो देश-विदेश की कई लड़कियां जान छिड़कती थीं, लेकिन उन्हें सायरा बानो पसंद आईं। सायरा उनसे 22 साल छोटी थीं। शादी के समय दिलीप की उम्र 44 थी, जबकि सायरा की 22 साल।
12 साल की उम्र से सायरा दिलीप को दीवानों की तरह चाहती थीं। जब ये चाहत दिलीप कुमार के सामने आई तब उनकी उम्र 44 साल थी और सायरा उस वक्त सिर्फ 22 साल की थी। दो बार प्यार में नाकामयाब रहे दिलीप सायरा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उम्र के फर्क के चलते भी दिलीप इस रिश्ते से कतरा रहे थे लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि सायरा उनसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हैं। 1966 में दोनों ने किसी को बिना बताए शादी कर ली।
दिलीप कुमार ने अपने और सायरा की उम्र के फासले को देखते हुए उनसे कह दिया था कि मेरे सफेद होते बालों को तो देखो! इसके बाद भी सायरा पीछे नहीं हटी। दिलीप साहब के प्यार मे ंसायरा इस कदर दीवानी थीं कि उन्होंने दिलीप कुमार को एम्प्रेस करने के लिए उर्दू और पार्सियन तक सीखा। उन्होंने दिलीप साहब की पसंद और नापसंद के बारे में भी जाना।
सायरा के प्यार को देखते हुए दिलीप कुमार ने उनसे शादी कर ली। दोनों ने कई मुश्किलों का सामना भी किया। दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'द सबस्टांस एंड द शैडो' में बताया है कि सायरा एक बार प्रेग्नेंट हुई थीं, लेकिन पैदा होने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना से दोनों ही बुरी तरह टूट गए थे। इसके बाद सायरा कभी मां नहीं बन सकीं। फिर भी दोनों साथ खड़े रहे।