ओटीटी बाजार में खुद को स्थापित करने की जी तोड़ कोशिशें कर रहे ईरॉस नाउ को चर्चित फिल्म निर्माता, निर्देशक संजय लीला भंसाली ने तगड़ा झटका दिया है। भंसाली ने अपनी दो मेगाबजट फिल्मों के वितरण व प्रसारण अधिकार ईरॉस नाउ से वापस ले लिए हैं। भुगतान करके सामग्री देखने वाले ग्राहकों के संकट से गुजर रहे ईरॉस नाउ ने फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है।
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इस फेरबदल के बाद से ही संजय लीला भंसाली की कंपनी भंसाली प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड ईरॉस नाउ से उसके फैसलों पर मतभेद मानती रही है। कंपनी को सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात पर रही कि उसकी बनाई फिल्में ईरॉस के इस नए समझौते के तहत उन देशों में भी ईरॉस के ग्राहक देख सकेंगे, जहां के लिए कंपनी ने इन फिल्मों के अधिकार दूसरी कंपनियों को बेच रखे हैं। भंसाली की कंपनी और ईरॉस के बीच फिल्मों के प्रचार-प्रसार का समझौता तय भौगोलिक सीमाओं के लिए ही हुआ बताया जाता है।
इसी क्रम में गुरुवार को भंसाली प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड ने एक बयान जारी कर कहा कि उनकी कंपनी ने ईरॉस इंटरनेशनल मीडिया लिमिटेड के साथ अपनी फिल्मों ‘गोलियों की रासलीला-रामलीला’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ को लेकर सारे करार खत्म कर लिए हैं। कंपनी ने इसके साथ ही उनसभी लोगों के लिए भी सूचना जारी कर दी है जो इन फिल्मों के प्रचार, प्रसार, वितरण या प्रदर्शन के लिए किसी भी तरह का सौदा अतीत में ईरॉस के साथ कर चुके हैं। भंसाली प्रोडक्शंस ने ऐसे सभी लोगों व कंपनियों से इन फिल्मों का सौदा आगे से न करने को कहा है। ईरॉस ने अब तक इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ईरॉस नाउ ओटीटी के भुगतान करने वाले ग्राहक पिछली रिपोर्ट तक इसके कुल पंजीकृत ग्राहकों के 20 फीसदी भी नहीं बचे थे। आम तौर पर किसी ओटीटीट में पंजीकृत ग्राहकों और भुगतान करने वाले ग्राहकों का प्रतिशत 60 से ऊपर होना ही स्वस्थ औसत माना जाता है। सिर्फ 20 फीसदी भुगतान करने वाले ग्राहकों के साथ ईरॉस नाउ का भविष्य मुश्किल में नजर आ रहा है। कंपनी ने इसी साल फरवरी में बताया था कि उसके कुल पंजीकृत ग्राहकों की संख्या 21.15 करोड़ है जबकि इसमें से भुगतान करके मनोरंजन सामग्री देखने वालों की संख्या सिर्फ 3.62 करोड़ ही बची है।