रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
कांटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही
यह गाना साल 1974 में आई एक्टर विनोद खन्ना की फिल्म 'इम्तिहान' का है। फिल्म की शानदार कहानी ने दर्शकों के दिलों को जीता।
महान गायक और संगतीकार किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को बंगाली परिवार में हुआ था। अपने फिल्मी करियर में किशोर कुमार ने करीब 1500 से ऊपर गाने गाए। 70-80 के दशक में जितने दीवाने मोहम्मद रफी की आवाज के थे उतना ही किशोर कुमार को भी लोग सुनना पसंद करते हैं।
किशोर कुमार ने हिंदी सिनेमा के हर एक वर्ग के दर्शकों का दिल अपने गीतों से जीता। दिल की गहराई में उतरते किशोर के कई गाने इसी वजह से एवरग्रीन हैं।
ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
और
ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
'सफर' और 'आपकी कसम' जैसी फिल्मों में किशोर कुमार ने अपने गानों से न केवल जिंदगी के कई पहलूओं को समझाया, बल्कि जिंदगी की नई परिभाषा को अपने गानों में पिरोया है।
मेरे दिल में आज क्या है
तू कहे तो मैं बता दूँ ...
और
पल पल दिल के पास, तुम रहती हो
जीवन मीठी प्यास, ये कहती हो
पल पल ...
जैसी रोमांटिग गानों से भी उन्होंने काफी ख्याती बटोरी। कहा जाता है कि 70-80 के दशक में युवाओं की पहली पसंद बनकर उभरे किशोर कुमार के गानों को सुनने के लिए हर कोई उतावला रहता था। कॉलेजों में ज्यादातर युवा उनके ऐसा रोमांटिग गाने सुनना पसंद करते थे।
किशोर दा के गानों का एक और पहलू था। उनके गाने किसी तन्हाई में अकेले कभी दिल के दर्द को कम कर देता है, तो कभी भूले प्यार की यादों ताजा कर देता।
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
जो लिखा था
जो लिखा था आँसुओं के संग बह गया
मेरा जीवन ...
और
खिज़ा के फूल पे आती कभी बहार नहीं
मेरे नसीब में ऐ दोस्त, तेरा प्यार नहीं
मेरे नसीब में ऐ दोस्त, तेरा प्यार नहीं ...
किशोर कुमार ने फिल्म 'कोरा कागज' और 'दो रास्ते' जैसी कई शानदान फिल्मों में अपने दर्द भरे गानों से भी कई दर्शकों के दिलों का जीता है। यही वजह है कि उन्होंने हिंदी सिनेमा का सदाबहार गायक कहा जाता है।