हिंदी सिनेमा के जिन तकनीशियनों को भट्ट कैंप छोड़ने के बाद ही कायदे की शोहरत मिली, उनमें से एक हैं फिल्म एडीटर अकीव अली। मर्डर, वो लम्हें, काइट्स, डर्टी पिक्चर, प्यार का पंचनामा, अग्निपथ और बर्फी जैसी फिल्में एडिट करने वाले अकीव की निर्माता-निर्देशक लव रंजन से लंबी दोस्ती ने उन्हें अब फिल्म निर्देशक बना दिया है। दे दे प्यार दे उनकी पहली फिल्म है, अकीव अली से एक खास मुलाकात।
'दे दे प्यार दे' के डायरेक्टर अकीव अली का इंटरव्यू, बोले- 'निर्देशकों का मजाक उड़ाना छोड़ दिया'
ऋषिकेश मुखर्जी से लेकर डेविड धवन और अब आप तक, फिल्म एडीटर्स के निर्देशक बनने की एक लंबी परंपरा है। कितना फर्क आता है कुर्सी बदलने से?
एडिटिंग का अगला पड़ाव निर्देशन है, यह मैं नहीं मानता। हां,एडिटिंग करने की वजह से मुझे काफी मदद मिली है निर्देशन में। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि काम आसान हो गया। आप कितनी भी नेट प्रैक्टिस कर लो लेकिन असली काम तो मैच में ही करना पड़ता है। हां, इस फिल्म के बाद मेरे नजरिए में बहुत बदलाव आया है। निर्देशकों को लेकर मेरे सोचने का नजरिया बदल गया। पहले मैं कई निर्देशकों का मजाक उड़ाता था अब पता चला कि कितना मुश्किल काम है।
तो इस मुश्किल काम को आपने खुद आगे बढ़कर अपनाया या फिर कहीं और से इसकी शुरूआत हुई?
प्यार का पंचनामा के समय से मेरी और लव रंजन की ट्यूनिंग बनी। हम अक्सर नए नए प्रोजेक्ट्स को लेकर बातें करते रहते हैं। एक दिन उनका फोन आया। लव ने फोन पर कहा, ‘एक बहुत ही मजेदार कॉन्सेप्ट लेकर मैं फाइनेंसर से मिलने जा रहा हूं और मैं चाहता हूं कि यह फिल्म तुम निर्देशित करो।‘
फिल्म दे दे प्यार दे में तब्बू से लेकर अजय देवगन और रकुल प्रीत तक उम्र का फासला बहुत है। कैसा अनुभव रहा इस फिल्म में उनके साथ काम करने का?
अजय और तब्बू में कमाल की ऊर्जा है। जब आपका मुख्य कलाकार इतनी ऊर्जा के साथ काम करता है तो सभी को काम करने में मजा आता है। तब्बू जब स्क्रिप्ट पढ़ती थीं तो मैं हंसता रहता था। 5 मिनट के अंदर हम सीन शूट कर लेते थे। रकुल भी काफी ऊर्जा के साथ प्रोजेक्ट पर आईं। साथ ही उनमें सीखने की चाह भी काफी है। वह कठिन परिश्रम करने के लिए हरदम तैयार रहती हैं।
मेरा एक सवाल ऋतिक रोशन की काइट्स को लेकर है, क्या लगता है ये फिल्म क्यों नहीं चली?
आपने मेरी दुखती रग पकड़ ली। ये फिल्म मेरी बेस्ट एडिटेड फिल्मों में से एक है। अब मुझे लगता है कि काइट्स की कहानी हमने कुछ ज्यादा लंबी कर दी। फिल्म में हमने स्पैनिश भाषा के तमाम सीन डाले, हो सकता है दर्शकों को वह पसंद न आया हो। इस फिल्म के फ्लॉप होने से मैं भी हक्का-बक्का रह गया था लेकिन ऐसी विफलताओं से ही हमें सबक मिलते हैं।