'निराशाजनक परिस्थिति जैसा कुछ नहीं होता। आपमें हर परिस्थिति को बदलने की क्षमता होती है।' ये चंद पंक्तियां जानी-मानी लेखक रोंडा बर्न की किताब 'द सिक्रेट' की हैं, लेकिन यह पंक्तियां राकेश उदियार के जीवन की सच्चाई बयां करती हैं।
राकेश उदियार ने जिंदगी में कई कठिनाइयों का सामना किया है। लेकिन उन्होंने कभी अपनी मुश्किलों से हार नहीं मानी। आज वह बॉलीवुड के जाने-माने फिटनेस ट्रेनर हैं। 'दंगल' में आमिर खान की जिस बॉडी की तारीफ हर जगह हो रही है, उसके पीछे राकेश की ही मेहनत है।
राकेश एक आम परिवार से आते हैं। वह एक आम बच्चे की जिंदगी जी रहे थे कि एक दिन उनके पिता लकवाग्रस्त हो गए। तभी से राकेश के परिवार पर कठिनाइयों का पहाड़ टूट पड़ा। 7-8 साल की नाजुक उम्र में उन्हें और उनके भाई-बहनों को पैसों के लिए काम करना पड़ा। जब वह 12 साल के हुए तो उनके पिता चल बसे।
जिंदगी की गाड़ी चलाने के लिए राकेश मुंबई की लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचने लगे। कुछ सालों बाद वह लोगों के घरों में काम करने लगे। राकेश हर हाल में दसवीं तक पढ़ना चाहते थे, इसलिए उनके मालिक ने भी उन्हें स्कूल जाने की इजाजत दे दी। वो जगह स्कूल ही थी जहां से राकेश को फिटनेस का शौक चढ़ा।
इसके बाद उन्होंने एक ढाबे पर नौकरी करनी शुरू कर दी। वह कहते हैं, "मैं फिटनेस मैगजीन पढ़ने लगा। खाने में मुझे जो मिलता था, मैं वही खा लेता था।" राकेश ने जिम में नौकरी की तलाश जारी रखी और उन्हें एक जिम में नौकरी मिल भी गई, लेकिन सफाईवाले की। राकेश जिम में सफाई करते वक्त बाकी ट्रेनर्स को देखते और सीखते रहे।
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