कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...यह शायरी इस शख्स पर एकदम सटीक बैठती है।
जब बेटा पीसीएस अधिकारी बनकर सामने आया तो पिता का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के पौड़ी जिले के नैनीडाडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ेथ निवासी अरविंद सिंह नेगी की। एक न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, कभी व्यापारी की दुकान में बैठ खाता-बही संभाले तो कभी पिता की छोटी-सी दुकान में बैठ चाय बेचने का काम किया। लेकिन कभी अपने लक्ष्य से नहीं चूके।
अरविंद ने वर्ष 2003 में हाईस्कूल की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की। वर्ष 2005 में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी, लेकिन वे ये परीक्षा पास नहीं कर सके। इससे वे निराश नहीं हुए। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इस कारण अरविंद मेरठ जाकर पिता की छोटी-सी चाय की दुकान में हाथ बंटाने लगे। इसी अवधि में उन्होंने मेरठ से ही बीकॉम व एमकॉम की डिग्री भी हासिल की।
लेकिन, जीवन के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे पाने के लिए मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटा। नतीजा, जो छात्र इंटरमीडिएट की परीक्षा में फेल हो गया था, वही आज उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपी-पीसीएस लोअर) की परीक्षा पास कर श्रम प्रवर्तन अधिकारी बन गया है। उनका कहना है कि, अभी साल 2016 में दिए गए पीसीएस अपर परीक्षा के रिजल्ट का उन्हें इंतजार है। वहीं वे 2017 पीसीएस का मेन एग्जाम में भी देंगे।
इससे पहले अरविंद ने व्यापरियों के बहीखाते भी संभाले। वर्ष 2013 में पहली बार पीसीएस की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। साल 2015 में उन्होंने फिर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपी-पीसीएस लोअर) की परीक्षा दी। परीक्षा के परिणाम हाल ही में घोषित हुए हैं, जिसमें अरविंद का चयन श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पद के लिए किया गया है।
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