जहां औरतें सर पर पल्ला ढक कर चलती हैं और घर से बाहर निकलना उनके लिए खराब माना जाता है, वहां इस लड़की ने लड़की होने की परिभाषा ही बदल दी। इन्होंने ना ही सिर्फ मर्दों के खेल कहे जाने वाली पहलवानी में कदम रखा बल्कि उनको उसी अखाड़े में धूल भी चटाई। इनकी सफलता की कहानी ऐसी है कि आमिर खान भी इनके मुरीद हैं और उनकी आने वाली फिल्म 'दंगल' इन्हीं पर बनी है।
गीता फोगाट को आज किसी परिचय की जरूरत नहीं है। पूरी दुनिया में अपनी सफलता के झंडे गाड़ने वाली फोगाट की कहानी बहुत प्रेरणादायक है।
हरियाणा के जाट परिवार में जन्मीं गीता चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। इनके पिता महावीर सिंह फोगाट का हमेशा से सपना था कि उनकी बेटियां पहलवानी में भारत का प्रतिनिधित्व करें। महावीर सिंह फोगाट खुद ये सपना नहीं पूरा कर पाए थे जिसका गम उन्हें हमेशा रहा।
अपनी बेटियों को उन्होंने पहलवानी के लिए तैयार करना शुरू किया। गीता घर की बड़ी बेटी थीं इसलिए गीता ने सबसे पहले अखाड़े में कदम रखा। गीता की लड़ाई सिर्फ अखाड़े में दूसरे व्यक्ति से नहीं थी, बल्कि इस पूरे समाज से थी जो महिलाओं के इस अवतार को स्वीकारने के लिए राजी ही नहीं था।
हर कदम पर उन्हें यह जताया गया कि वह एक महिला हैं और पहलवानी मर्दों का खेल है। उन्हें यहां तक कहा गया कि कोई ऐसी लड़की से शादी के लिए तैयार नहीं होगा। गीता ने पहलवानी सीखने के लिए बाल छोटे कटवाए और शार्ट्स पहनने लगीं, जिसको लेकर उन्हें काफी टोका गया। जहां औरतों के सर से पल्लू गिरना भी बेशर्मी की बात मानी जाती हो वहां छोटे कपड़े पहनना अपने आप में हिम्मत की बात है।
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