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जापान की कंपनी का पैकेज ठुकराकर चुनी थी भारतीय सेना, 90 दिन में सोए सिर्फ 90 घंटे
Tue, 29 May 2018 04:04 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 29 May 2018 04:04 PM IST
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ये शख्स भीलवाड़ा के रायला गांव के रहने वाले परीक्षित आचार्य हैं। इन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में इंजीनियरिंग की है। इन्हें साल 2011 में दो नौकरियां एक साथ मिली है। एक जापान में और दूसरी इंडियन आर्मी में। आपको बता दें कि परीक्षित ने 9.50 लाख का जापान की कंपनी का पैकेज ठुकराकर आर्मी में बतौर लेफ्टिनेंट ज्वॉइन किया है।
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साल 2013 में वह कैप्टन और 2014 में मेजर बने। कुछ समय बाद उन्होंने घातक कमांडो कोर्स भी क्वालीफाई किया। इसके बाद उन्होंने पैरा कमांडो फोर्स की ट्रेनिंग की। एक रिसर्च के मुताबिक, पैरा कमांडो फोर्स की ट्रेनिंग वालों में 10% ही सिलेक्ट होते हैं। परीक्षित के बैच में भी 5 अफसर और 13 जवान थे लेकिन फोर्स में अकेले परीक्षित ही चुने गए।
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आर्मी एयर डिफेंस में इस ट्रेनिंग को देश की सबसे मुश्किल ट्रेनिंग माना जाता है। परीक्षित जिले के पहले और इकलौते पैरा कमांडो हैं। परीक्षित बताते हैं कि उन्हें आर्मी में जाने की प्रेरणा उनके बड़े भाई नवलेश और राघव आचार्य से मिली। नवलेश भी आर्मी में जूनियर कमिशन ऑफिसर हैं। पिता जगदीशचंद्र शर्मा एडवोकेट और मां सुमित्रा देवी गृहिणी हैं।
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परीक्षित के अनुसार पैरा कमांडो फोर्स की ट्रेनिंग 90 दिन की होती है। इसमें वह केवल 90 घंटे ही सो सकते हैं। यह देश की सबसे मुश्किल ट्रेनिंग है। इसमें ट्रेनिंग लेने वाले का ऊंचाई, पानी और जानवर से डर निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि वह अपनी ट्रेनिंग के दौरान 1350 किलोमीटर दौड़ चुके हैं। वहीं एक दिन में 16 से 18 घंटे तक एक्सरसाइज कराई जाती है। जवान को 22.50 किलो का बैग पैक और 3.50 किलो की बंदूक को लेकर रोज 40 किलोमीटर भागना होता है।
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