पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का आयोजन शुक्रवार, 19 फरवरी, 2021 को किया गया। विश्वविद्यालय के चांसलर होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। समारोह में विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके 2,535 विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां प्रदान की गई। इस मौके पर विश्व भारती के रेक्टर और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे भी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान आइए जानते हैं इस विश्वविद्यालय के बारे में कुछ रोचक जानकारियां...
विश्व भारती : ऐसा विश्वविद्यालय जहां बसती है प्राचीन भारत की आत्मा, जानिए क्यों खास है इसका इतिहास
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बता दें कि विश्व भारती एक ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां प्राचीन भारत की आत्मा बसती है। विश्व भारती की स्थापना 1921 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहां आज भी खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं। इस विश्वविद्यालय में आज भी गुरुकुल व्यवस्था की तरह ही खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि विश्वविद्यालय कंप्यूटरीकृत ऑनलाइन शिक्षा के इस युग में पिछड़ा होगा। विश्व भारती विश्वविद्यालय भारत का केंद्रीय विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का संस्थान भी घोषित है। परिसर में हर ओर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक दिखाई देती है।
इतिहास
शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की शुरुआत एक आश्रम के तौर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (ठाकुर) के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में 07 एकड़ जमीन पर एक आश्रम की स्थापना की थी। जहां बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया और इसे विज्ञान के साथ कला और संस्कृति की पढ़ाई का उत्कृष्ट केंद्र बनाया। 1901 में केवल 05 छात्रों के साथ गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर ने इसकी शुरुआत की थी। 1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और आज यहां छह हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं।
भारत के राष्ट्रपति हैं विजिटर
मई 1951 में, संसद के एक अधिनियम द्वारा विश्व-भारती को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया। साथ ही इसे एकात्म, शिक्षण और आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। इस विश्वविद्यालय के विजिटर (आगंतुक) भारत के राष्ट्रपति हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रेक्टर हैं, और भारत के प्रधानमंत्री चांसलर के रूप में सुशोभित करते हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं।
शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध
केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित इस विश्वविद्यालय से 10 उप-संस्थान भी संबद्ध हैं जो उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध हैं। विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। यहां के पुस्तकालय में दुनियाभर की किताबों मौजूद हैं। यह विश्वविद्यालय अपने शांत और प्राकृतिक वातावरण के लिए भी जाना जाता है। यहां आने वाले लोग यहां के खान-पान के भी मुरीद हैं। यहां की प्राकृतिक छटा मनमोहक है और यह विश्वविद्यालय दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है।
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