फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

स्थायी कमीशन: 17 वर्ष बाद मिला अधिकार, जानिए अन्य देशों की सेना में क्या है महिलाओं की भूमिका

Sun, 28 Mar 2021 06:35 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sun, 28 Mar 2021 06:35 PM IST
विज्ञापन
Permanent Commission : In India after 17 years women got their rights, know what position women hold in other countries
सेना में महिलाओं की भूमिका - फोटो : सोशल मीडिया

17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 17 फरवरी 2020 को थलसेना में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने का रास्ता साफ हो गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद महिलाओं को स्थायी कमीशन नहीं दिया गया। 17 महिला अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने के भीतर महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने और नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए दो महीने के भीतर स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया।   

अब देश में महिलाएं अर्धसैनिक और सशस्त्र बलों में दमखम के साथ शामिल हो रही हैं। हाल ही में असम राइफल्स में तकरीबन 200 महिलाएं बतौर राइफल महिला शामिल हुईं हैं। अगली स्लाइड में जानिए कौन-कौन से खास देश हैं, जहां महिलाएं जांबाजी से बतौर सैनिक देश की सेवा में जुटी हुई हैं।

Trending Videos
Permanent Commission : In India after 17 years women got their rights, know what position women hold in other countries
सेना में महिलाओं की भूमिका - फोटो : सोशल मीडिया

अमेरिका : महिलाएं अमेरिकी सेना में गैर युद्धक भूमिकाओं में काम करती थीं, लेकिन 2016 में अमेरिकी सरकार ने पेंटागन के प्रतिबंध को खत्म करते हुए महिलाओं को अग्रणी युद्ध मोर्चे पर काम करने की इजाजत दे दी। अमेरिकी थल सेना में युद्ध मोर्चे पर जाने की इजाजत मिलने के तीन साल के अंदर यानी 2019 में 2906 महिला सैनिकों को स्थलीय युद्ध में अहम पद दिया गया।

Permanent Commission : In India after 17 years women got their rights, know what position women hold in other countries
सेना में महिलाओं की भूमिका - फोटो : सोशल मीडिया

कनाडा, इजराइल व डेनमार्क : इन तीनों ही देशों ने 80 के दशक के मध्य से अंत के बीच अपनी सेनाओं में महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में नियुक्ति दे दी थी। कनाडा ने 1989 में, इजराइल ने 1985 में और डेनमार्क ने 1988 में यह काम शुरू किया था। हालांकि, इजराइल में महिलाओं को सेना में शामिल करने का काम 1948 में गठन के साथ ही शुरू हो गया था। वहां महिलाओं का दो साल मिलिट्री में काम करना अनिवार्य है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Permanent Commission : In India after 17 years women got their rights, know what position women hold in other countries
सेना में महिलाओं की भूमिका - फोटो : सोशल मीडिया

ब्रिटेन : 2018 में ब्रिटिश सेना ने महिलाओं के अग्रणी युद्ध मोर्चे पर सेवा देने पर लगा प्रतिबंध हटाया था। साथ ही उन्हें एलीट स्पेशल फोर्स में काम करने का अधिकार भी दिया था।

नार्वे : 1980 के मध्य में नार्वे पहला नाटो देश बना था, जिसने महिलाओं को पूरी तरह लड़ाकू भूमिका निभाने की इजाजत दी थी।

रूस : रूसी सेना में महिलाओं की संख्या 10 फीसदी से भी कम है। 

विज्ञापन
Permanent Commission : In India after 17 years women got their rights, know what position women hold in other countries
सेना में महिलाओं की भूमिका - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

भारत में क्या है स्थिति

  • 1950 में बने आर्मी एक्ट में महिलाओं को सेना की स्थायी सेवा के लिए अयोग्य ठहराया गया था।
  • 42 साल बाद सरकार ने महिलाओं को पांच शाखाओं में अधिकारी बनाने की अधिसूचना जारी की।
  • 1992 जनवरी में महिलाओं के सेना में अधिकारी बनने का यह ऐतिहासिक पल आया।
  • 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के सेना में स्थायी कमीशन पाने का रास्ता साफ किया।
  • 03 महीने के अंदर सरकार को सभी सेवारत एसएससी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया।
  • शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 14 साल या उससे ज्यादा सेवाएं दे चुकी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का मौका दिया जाएगा।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed