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UPSC: जब इंटरव्यूवर ने पूछा कि इंटरव्यू हिंदी में लें या अंग्रेजी में तो टॉपर ने ये दिया जवाब

Sun, 26 Apr 2020 01:56 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sun, 26 Apr 2020 01:56 PM IST
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ias topper - फोटो : social media
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC - Union Public Service Commission) परीक्षा में हर साल लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। सबसे पहले प्रारंभिक और फिर आता है मुख्य परीक्षा देने का समय। इन दोनों पड़ावों को पार करने के बाद उम्मीदवार आखिर में साक्षात्कार के पड़ाव तक पहुंचते हैं। यूपीएससी परीक्षा 2014-15 में उत्तर प्रदेश के मेरठ के निशांत जैन हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में अव्वल रहे। वरीयता सूची में उनका 13वां स्थान रहा। इतनी बड़ी सफलता निशांत ने आखिर कैसे पाई? आगे पढ़ते हैं इनकी पूरी स्ट्रेटजी...
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ias topper - फोटो : social media
निशांत ने बताया कि जब रिजल्ट आया तो वे 13वीं रैंक पाकर बड़े खुश हुए। उन्हें पता था कि इस बार उनका सिलेक्शन हो जाएगा। पर इतनी अच्छी रैंक मिलने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा के लिए ये उनका दूसरा प्रयास था।
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ias topper - फोटो : social media
जब उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो निशांत ने बताया कि मुझे राशन कार्ड से इसकी प्रेरणा मिली थी। राशन कार्ड को खाद्य रसद अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। बचपन में वे अपने परिवार के राशन कार्ड पर अधिकारी शब्द को देखते थे, तो उन्हें वह बहुत आकर्षित लगता था। जब दसवीं क्लास में आए, तब समझ आया कि अधिकारी बनने के लिए सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है।
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upsc - फोटो : file photo
सपना तो मैट्रिक से ही था, लेकिन परिस्थितियों और संघर्ष के चलते सीधे ग्रेजुएशन के बाद इस एग्जाम में बैठने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। वे अपने करियर को सेफ जोन में रखकर आईएएस की तैयारी करना चाहता थे, इसलिए जब वे लोकसभा में हिंदी असिस्टेंट के पद पर नौकरी करने लगे, तब उन्होंने अपने सपने के लिए प्रयास शुरू किए।

शुरुआत उनके मन में थोड़ा डर भी था कि इस एग्जाम के लिए लोग जी जान से जुड़कर मेहनत करते हैं वहां मैं नौकरी करते हुए आईएएस बनने का सपना देख रहा हूं। लेकिन, जब पढ़ाई शुरू की, तो उनके लिए यह अपने विषयों का रिविजन ही था, क्योंकि हिंदी साहित्य उनका विषय था। दूसरा, स्कूल में जिन विषयों को पढ़ा था, वे उन्हें भूले नहीं थे। उनका कहना है कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट हो, तो उस तक पहुंचने का रास्ता आप ढूंढ ही लेते हैं।
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UPSC Civil Services Result
आईएएस बनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिससे आप डर जाएं। बस खुद को पॉजिटिव रखें और नकारात्मकता फैलाने वालों से दूर रहें। हिंदी माध्यम के छात्र अक्सर अंग्रेजी भाषा से डरते हैं, लेकिन इसे हौव्वा न समझें और इसकी अच्छे से तैयारी करें। अंग्रेजी के प्रति एक बात ध्यान में रखें कि वह हिंदी से ज्यादा आसान होगी। हिंदी वर्णमाला में 52 अक्षर हैं, तो अंग्रेजी में 26 हैं।

उन्होंने बताया कि इंटरव्यू में पहला प्रश्न भाषा को लेकर ही पूछा गया था कि आप हिंदी में इंटरव्यू देना चाहेंगे या अंग्रेजी में। उन्होंने कहा, ‘मेरी प्राथमिकता हिंदी होगी, लेकिन यदि आप अंग्रेजी में करना चाहें, तो मुझे ऐतराज नहीं है।’ इसके बाद पैनल ने उनसे भाषा, अंग्रेजी, समाज, धर्म, भारतीय अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि विषयों पर 35 मिनट तक चर्चा की। वे किसी भी प्रश्न पर घबराए नहीं, सहजता से जवाब दिए।
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